संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने लोगों को भारतीय संस्कृति का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि भारतीय नववर्ष चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। जब प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में अपनी दिव्य छठा को वसंत ऋतु के रूप में बिखेरती है। विज्ञान के लिए यह एक आश्चर्य की बात है कि ब्रह्मांड में ग्रहों की स्थिति और पंचांग की गणना इतनी सटीक कैसे होती है।
उन्होंने कहा कि हमारे के ऋषि, मुनि, तपस्वी महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने गूढ़ व आध्यात्मिक तथ्यों पर अनुसंधान कर संपूर्ण मानव जाति को अनमोल निधियां प्रदान की हैं। विलक्षण बात ये है कि उनके अनुसंधान का आधार भौतिक शरीर नहीं था। वे इस भौतिक शरीर को माध्यम बनाकर ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना के द्वारा अपने सूक्ष्म शरीर से संपूर्ण ब्रह्मांड में गोचर करके उनकी गणना, स्थिति एवं काल का निरीक्षण करते थे।
मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण भारतीय नववर्ष के दिन ही किया था। आदि शक्ति के पूजन का प्रथम दिवस भी इसे ही माना जाता है। इसी लिए भारतीय नव वर्ष की शुरुआत नवरात्रि से की जाती है। पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का राज्य अभिषेक भी इसी तिथि को ही किया गया था। भारत के विभिन्न राज्यों में नव वर्ष को अलग अलग रूप में पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है।