संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। व्यासपुर से पांच किलोमीटर दूर बसातियांवाला गांव में स्थित प्राचीन श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पंचमुखी हनुमान मंदिर में स्थापित मूर्ति के चार मुख चारों दिशाओं में हैं। पांचवां मुख आकाश की तरफ है। कहा जाता है कि इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों को यहां पर हनुमान जी के दर्शन हुए थे।
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर का इतिहास लगभग 700 वर्ष पुराना है। मंदिर का शिलान्यास बाबा जानकी दास महाराज ने किया था। बताते हैं कि बाबा जानकी दास के स्वप्न में आकर स्वयं हनुमान जी ने दर्शन दिए और ढाक के पेड़ के नीचे उनको अपनी प्रतिमा स्थापित करने के लिए कहा।
इसके बाद बाबा जानकी दास ने विभिन्न तीर्थ स्थलों से मिट्टी लाकर उसी रूप में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर दी जिस रूप में उन्हें दर्शन हुए थे। उस दौरान यह क्षेत्र वीरान जंगल था। एक के बाद एक तपस्वी आए और मंदिर की भव्यता बढ़ती चली गई।
आज करीब पांच एकड़ में मंदिर बना हुआ है। यहां पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती हैं। राम नवमी से हनुमान जयंती तक अखंड महामंत्र का जाप किया जाता है। हर मंगलवार मंदिर में मेला लगता है। जिसमें औसतन 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए लंगर तैयार किया जाता है। ढाक के पेड़ के नीचे मूर्ति होने के कारण इसे ढाका मंदिर भी कहा जाता है।हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
श्री पंचमुखी हनुमान कल्याण समिति व समस्त क्षेत्रवासियों के सहयोग से धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। राम दरबार भी सजाया गया है। मंदिर समिति के प्रधान सुखबीर सिंह ने बताया कि 12 अप्रैल को रामनवमी से हनुमान जन्मोत्सव तक चलाए जा रहे अखंड राम संकीर्तन पाठ का समापन किया जाएगा।
सुबह सबसे पहले पंचमुखी महाराज की पूजा अर्चना की जाएगी। दोपहर को आरती होगी। शाम को बाला जी महाराज का जागरण होगा, जागरण में रोशन प्रिंस पंजाब, किशन भगत इंदौर, बबली शर्मा बठिंडा पंजाब ो श्री बाला जी का गुणगान करेंगे।
ये है पांच मुखों का महत्व
मंदिर समिति के प्रधान सुखबीर सिंह के मुताबिक पूर्व दिशा की ओर हनुमान जी का मुख है। ये बल बुद्धि के दातार हैं। दूसरा मुख जो पश्चिम की तरफ है, वह गरुड़ देव का है। जिन्हें पक्षियों का राजा कहा जाता है। जितने भी विष पदार्थ हैं, उनको भक्षण करने के लिए और जिनकी कुंडली में काल सर्प योग होता है, उनको दर्शन करने मात्र से ही शांति मिल जाती है। तीसरा मुख जो उत्तर दिशा में है, वो वराह भगवान का है। सदा संतोषी, सदा सुखी। चौथा मुख जो दक्षिण दिशा में है, ये नरसिंह भगवान का है। ये शत्रु या दुश्मन का वध करने के लिए है। पांचवां मुख जो आकाश की तरफ है, वो हैग्रिव भगवान का है। ये वशीकरण या तंत्र मंत्र सबको काटने के लिए है।