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व्रत, तप की महिमा अद्भुत : अतुल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी वर्कशॉप। श्री राधा कृष्ण सखा मंडल की ओर से करवाई जा रही संगीतमयी भक्तमाल कथा का सोमवार को दूसरा दिन रहा। कथा में अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि योग, यज्ञ, व्रत, तप, तीर्थ और सेवा सभी की स्वयं में महिमा अद्भुत है। मगर विचारणीय है कि योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत, नियम, साधनाएं सब कर लिया, मगर भगवत भजन में आसक्ति नहीं बनी।
उन्होंने बताया कि भगवत नाम में आसक्ति नहीं बनी तो भगवत भजन मेें आसक्ति किए बिना यह सब उपाय निष्फल हो जाएंगे। सबकी पूर्णत: तभी मानी जाएगी जब भगवत में हमारी आसक्ति बनेगी। हम कितने भी आभूषण भी पहन लें और वस्त्र न पहने तो उन आभूषणों का कोई मोल नहीं रहता। उसी प्रकार हम बिना भगवत आसक्ति के व्रत, तप का महत्व नहीं रहता।
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उन्होंने कहा कि जीव का भगवान से केवल प्रेम का संबंध है। व्यवहारिक संबंध में भगवान हमारे कुछ नहीं हैं। जीव का भगवान से केवल प्रेम का संबंध है। प्रेम में हर संबंध स्वीकार होता है। उन्होंने कहा कि कई महीनों तो ठाकुर जी त्रिलोचन के यहां नौकर बनकर रहे। दिन भर प्रसाद बनाकर संतों को खिलाते और जब त्रिलोचन सो जाते तो रात भर उनके चरण दबाते। उन्होंने कहा कि यदि भक्त की आसक्ति निष्काम व निस्वार्थ होगी तो भगवान हमारे लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाएंगे।
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