कागजों में मलेरिया पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नायाब तरीका खोज लिया है। पिछले तीन साल से मरीजों की पहचान के लिए तैयार की जाने वाली स्लाइडों की संख्या में भारी गिरवाट देखी जा रही है।
यही वजह है कि मलेरिया पॉजिटिव केसों की संख्या साल दर साल घट रही है और विभाग के अधिकारी खुद ही अपनी पीठ थपथपाते नजर आ रहे हैं।
मलेरिया के मामले में यमुनानगर डेंजर जोन में आता है। खुद को बचाने के लिए विभाग के अधिकारी सारा दोष दूसरे राज्यों (उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) से आने वाले मजदूरों पर मढ़ देते हैं, लेकिन अब विभाग ने आंकड़ों में गिरावट का नायाब तरीका खोज लिया है।
मलेरिया केसिज की पहचान के लिए तैयार की जाने वाली स्लाइडों की संख्या पिछले तीन साल से गिरावट देखी गई। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जब स्लाइड ही कम बनेगी, तो मरीजों की पहचान कैसे होगी, इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
स्लाइडों में छिपा मलेरिया के मरीजों का खेल
वर्ष स्लाइडों की संख्या मरीजों की संख्या
2011 169360 5212
2012 121788 3659
2013 60000 1400
पहले स्लाइडों की संख्या के साथ बढ़ रहे थे मरीज
वर्ष स्लाइडों की संख्या मरीजों की संख्या
2007 61287 196
2008 64583 995
2009 86289 3252
2010 133536 3481
कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहा विभाग
विभाग के अधिकारी स्लाइड तैयार करने के मामले में कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर्स की 99 पोस्ट है। महज 12 कर्मचारी ही नियुक्त हैं, जबकि 50 कर्मचारियों को कांट्रेक्ट पर पांच महीने (जुलाई से नवंबर) के लिए नियुक्त किया है। कर्मचारियों की कमी में स्लाइड तैयार करने का काम प्रभावित हो रहा है।