पापुलर और सफेदा के कम दाम मिलने और इनकी खरीद में प्लाई बोर्ड उद्योगपतियाें की ओर से तीन प्रतिशत की कटौती किए जाने के विरोध में जिलेभर के सैकड़ों किसानाें ने सोमवार को लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने किया। लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर रहे किसानों को एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर समझाया।
किसानों ने सफेदा और पापुलर का समर्थन मूल्य तय निर्धारित रने के लिए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम आदित्य दहिया को ज्ञापन सौंपा। उन्हाेंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को पापुलर और सफेदे का उचित दाम नहीं दिया गया तो किसान सड़काें पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
किसान सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले जगाधरी अनाजमंडी में एकत्रित हुए। यहां उन्हाेंने भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में किसान पंचायत की। पंचायत के बाद सभी किसान नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय की ओर रवाना हुए। किसान एक कार पर लाउड स्पीकर लगाकर नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे-73 से होते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। लघु सचिवालय में पहुंचकर किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा पापुलर का समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किए जाने पर किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की।
लगभग आधा घंटे तक किसान लघु सचिवालय में जमकर गरजे। किसान उपायुक्त मंदीप सिंह बराड़ को ज्ञापन देने के लिए आए थे, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में एडीएम जगाधरी डा. आदित्य दहिया किसानों का ज्ञापन लेने पहुंचे। किसानों ने सफेदा और पापुलर का समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए मुख्यमंत्री के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा किसान पांच-छह साल में पापुलर-सफेदा की फसल को काश्त करता है। पापुलर सफेदा की फसल को लेकर सरकार की कोई नीति नहीं है।
किसानों को सब्जी की तरह पापुलर-सफेदे की फसल बेचनी पड़ रही है। सरकार द्वारा किसानों की पापुलर और सफेदा की फसल का दाम निर्धारित नहीं होने से उत्पादक किसान प्लाई बोर्ड उद्योगपतियों के मनमाने रवैये का शिकार हो रहे हैं। आरोप है कि वह अपने मनमाने दामों पर उनकी लकड़ी की फसल को खरीदता है। इसके साथ ही आढ़ती भी कई प्रकार की कटौती करता है। पापुलर-सफेदे की फसल का समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं होने से किसानों को शोषण का शिकार होना पड़ रहा है।
अनाजमंडी की तरह हो मार्केट कमेटी
भाकियू के मंडल प्रधान बाबू राम गुदियाना, जगाधरी प्रधान हरपाल सुढल ने कहा कि यहां लक्कड़मंडी और प्लाई बोर्ड उद्योग भारत में ही नहीं एशिया में भी पहचान बना चुका है, लेकि न मंडी की मार्केट कमेटी नहीं है। उन्हाेंने कहा कि लक्कड़मंडी का कारोबार भी अनाज मंडी की तरह मार्केट कमेटी की देखरेख में हो, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके। लक्कड़ मंडी का व्यापार आफ द रिकार्ड होने की वजह से जहां किसानों को शोषण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को भी भारी राजस्व की चपत लग रही है।
मिलते हैं आधे दाम
भाकियू जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि किसानों को पापुलर के मात्र 700 से 900 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं सफेदे की कीमत 600 रुपये से 800 रुपये प्रति क्विंटल है। पहले किसानों को 1400-1500 रुपये प्रति क्विंटल तक सफेदा और पापुलर के दाम दिए जा रहे थे, लेकिन अब दाम आधे कर दिए गए हैं, जो किसानों के लिये बहुत बड़ा आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है।
जे फार्म के तहत हो खरीद
किसान नेता ने कहा कि पापुलर और सफेदा फसल की खरीद आढ़ती द्वारा जे फार्म (पक्का बिल) के तहत होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बनी रहती है, लेकिन आढ़ती पापुलर की खरीद कच्ची पर्ची पर कर रहे हैं। इससे किसानों को पापुलर की पेमेंट बैंक में जमा करवाने पर दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं। बैंक के कर्मचारी पापुलर की रकम के बारे में किसानों से जानकारी मांगते हैं। ऐसे में किसानों के पास आढ़ती की दी हुई केवल कच्ची पर्ची होती है जो मान्य नहीं है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि सरकार पापुलर के आढ़तियों के लिये जे फार्म जारी करना अनिवार्य करें, ताकि किसानों को दिक्कत का सामना न करना पडे़।
हाईवे से मंडी का हो स्थानांतरण
शहर में तीन लक्कड़ मंडियां हैं। तीनों मंडियां हाईवे पर है। जगाधरी लक्कड़ मंडी जहां एनएच-73ए पर है, वहीं यमुनानगर की लक्कड़मंडी पांसरा के पास और ममीदी के पास है। हाईवे पर मंडियां होने से यहां पर यातायात बाधित होता है। सरकार की ओर से मानकपुर गांव में नई लक्कड़मंडी बनाई गई है। इसके बाद भी हाईवे पर ही लक्कड़ मंडियां चल रही है। किसानों ने मांग की है कि इन लक्कड़मंडियाें का स्थानांतरण मानकपुर में किया जाए।
इस मौके पर मौकेे पर जगाधरी प्रधान हरपाल सुढल, गुरमुख सिंह, संदीप टोपरा, राम सिंह जत्थेदार, कश्मीरी लाल, जोगिंद्र सिंह, ज्ञान सिंह पंडित, रणबीर सिंह, कर्म सिंह मथाना, धर्मबीर अमलोहा, नरेश कांबोज, सुखदेव सलेमपुर, बिट्टू लेदी, संजू सरावां, नरेश भोगपुर, जगमाल सिंह, अनिल मंडेबर, मंदीप रोडछप्पर, कृष्ण पाल सुढल, बिट्टू हड़तान, संदीप महेश्वरी, कर्णसिंह, नाथीराम दोहली, कर्ण बुबका, जयपाल चमरोड़ी, गेंदाराम चमरोडी, बाजसिह हड़तान, जगीर छारी, जयपाल चमरोड़ी आदि किसान मौजूद रहे।