संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मलिकपुर बांगर गांव में मानसून सीजन के दौरान हुई तेज बारिश का असर अभी तक कम नहीं हुआ है। गांव के खेतों में करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी भरा हुआ है, जिसके कारण लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह पानी में डूबी पड़ी है। लगातार जलभराव के कारण खेतों में दलदल हो गई हैं। अधिकतर किसान गेहूं की बिजाई आज तक नहीं कर पाए, जिससे उन्हें नुकसान होगा। कई खेतों में तो पानी के ऊपर काई की मोटी परत जम चुकी है।
मलिकपुर बांगर गांव के किसान नरेश गर्ग, रोहित, विजयपाल, राकेश राणा, कुलदीप राणा, मांगे राम, वीर बहादुर, सचिन, रोहित, राजेश शर्मा, निर्मल व लवली ने बताया कि बारिश रुकने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि संबंधित विभाग जलनिकासी की व्यवस्था करेगा, लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वह निकासी के लिए एसडीएम व्यासपुर कार्यालय, तहसीलदार और समाधान शिविरों में भी कई बार शिकायत दर्ज करवा चुके हैं। इसके बावजूद पानी निकालने के लिए न तो कोई मशीन लगाई गई और न ही किसी कर्मचारी ने मौके पर आकर स्थिति का जायजा लिया। हर साल बरसात में कुछ मात्रा में पानी खेतों में इकट्ठा होता था, लेकिन इस बार स्थिति बेहद गंभीर है। लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से खेतों की उर्वरक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
अगर पानी जल्द ही नहीं निकाला गया तो जमीन को फिर से खेती योग्य बनाने में महीनों लग जाएंगे। मानसून के दौरान आई बाढ़ और लगातार बारिश से उनकी पिछली फसलें भी खराब हो गई थीं, जिनका मुआवजा आज तक नहीं मिला। नुकसान का सर्वे तो हुआ था, लेकिन मुआवजा जारी नहीं किया गया। इससे उनकी आर्थिक हालत और खराब होती जा रही है।
पहले से ही फसल खराब होने का बोझ और अब गेहूं की बिजाई न होने की चिंता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसानों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ही जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। पिछली फसलों के नुकसान का मुआवजा जल्द जारी किया जाए, ताकि वे अगली खेती के लिए संसाधन जुटा सकें।
मलिकपुर बांगर गांव में करीब 400 एकड़ जमीन में बारिश का पानी था। उसमें से ज्यादातर पानी की निकासी हो चुकी है। जो बचा हुआ था वह भी लगभग सूख चुका है। भविष्य में ऐसी दिक्कत न होने के लिए निकासी की योजना बनाई जा रही है।
- जसपाल सिंह गिल, एसडीएम व्यासपुर।