नगर निगम के अधिकारियों का व्यवहार हमारे प्रति ठीक नहीं है। जो भी फैसले
लिए जा रहे हैं उनकी भनक तक हमें नहीं लगने देते। आखिर हम जनता के
प्रतिनिधि हैं, जनता के प्रति हमारी भी कुछ जवाबदेही बनती है।
डीसी साहब अब
यह सहन नहीं होगा। आप ही कोई कदम उठाएं तो अच्छा है। यह पीड़ा थी पार्षदों
की। जो वे सोमवार सुबह डीसी को सुनाने के लिए डीसी कार्यालय में पहुंचे
थे। सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू के नेतृत्व में पहुंचे 10 पार्षदों ने
खुलकर डीसी के सामने अपनी पीड़ा को सुनाया।
उनका कहना था कि पार्षदों के
चुनाव हुए चार माह हो गए हैं। लेकिन अभी तक एक ही बैठक हो पाई है। ऐसे में
कैसे शहर में विकास कार्य हो पाएंगे। जो बैठक हुई थी उसमें न तो अधिकारी
उनकी किसी को बात को सुनने को तैयार ही नहीं है। नगर निगम में अनियमितताओं
की सभी हदें लांघी जा रही हैं। विपक्ष कई बार बैठक करने की मांग कर चुका
है। लेकिन कोई अधिकारी सुनने को तैयार ही नहीं है।
ऐसे में शहर का विकास
कैसे हो पाएगा। उनका कहना है कि उन्हें बैठक के मिनट्स भी अभी तक उपलब्ध
नहीं कराए गए हैं। इस बारे में भी कई बार मांग कर चुके हैं।
अधिकारी चुपके से कर रहे भर्ती
पार्षदों
का कहना था कि नगर निगम अधिकारी चुपके से भर्तियां करने में लगे हैं और
पार्षदों को इसकी सूचना भी नहीं दी जा रही है। जब पार्षद गुपचुप हो रही
भर्तियों की जानकारी मांगने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें लिस्ट देने से
ही मना कर दिया जाता है। जिस सोसाइटी के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया की जा
रही है उसकी भूमिका संदेह के घेरे में है। इससे तुरंत रद्द किया जाए।
सीनियर डिप्टी मेयर ने डीसी से मांग की कि बगैर हाउस को विश्वास में लिए की
जा रही इस भर्ती को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। इस तरह की गई भर्ती
सहन करने योग्य नहीं है कि अधिकारी अपने तरीके से भर्तियां करें और इसकी
जानकारी न तो पार्षदों को दी जाती है और न ही जनता को। पार्षदों ने डीसी को
मांग पत्र भी सौंपा। इन मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की। डीसी को
मिलने के लिए डिप्टी मेयर रामपाल, पार्षद कुसम त्यागी, नीरज राणा,
कर्मबीर, जयबीर, संगीता सिंगल, प्रीति जोहर, प्रमोद सेठी और भाजपा प्रदेश
कार्यकारिणी सदस्य राकेश त्यागी पहुंचे थे।
भर्ती की लिस्ट ली तो की गाली गलौच
पवन
बिट्टू ने डीसी को कहा कि पिछले दिनों उन्हें पता चला कि निगम में चोरी
छिपे कर्मचारियों की भर्ती हो रही है। जब कप्यूटर ऑपरेटर से इसकी लिस्ट
मांगी गई, तो उन्होंने देने से मना कर दिया। काफी देर बाद जब लिस्ट हाथ में
आई तो कुछ लोगों ने लिस्ट छीनकर उसे फाड़ दिया। इतना ही उन लोगों ने उसके
साथ हाथापाई की और उसे गालियां भी दी। उनका कहना है कि इन लोगों के खिलाफ
कार्रवाई की जाए।
निगम में खूब हो रहा भ्रष्टाचार
पार्षदों ने
निगम अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए डीसी को कहा कि अवैध निर्माण को लेकर
पहले तो निगम के अधिकारी पैसे को लेनदेन कर सेटिंग कर लेते हैं। लेकिन जैसे
ही अधिकारी का तबादला हुआ और दूसरे अधिकारी ने चार्ज संभाला तो निर्माण
करने वाले को नोटिस थमा दिया जाता है। उनका आरोप है कि निगम में भ्रष्टाचार
खूब हो रहा है। इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पिछले दिनों खजूरी
रोड पर दुकानदारों और निगम अधिकारियों के बीच जो हुआ वह इसी का नतीजा था।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी उनकी बातों पर ध्यान ही नहीं देते। पार्षदों
को अपने वार्ड की पूरी जानकारी है। उन्हें पता रहता है कि कहां पर अवैध
निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर वार्ड में कहीं पर अवैध
निर्माण शुरू होता है और इसकी जानकारी अधिकारियों को दी जाती है तो उनकी ओर
से कोई एक्शन नहीं लिया जाता। बाद में जब निर्माण कार्य हो जाता है, तो
फिर निगम के अधिकारी ध्यान देते हैं।
पार्क के नाम पर डॉक्टर बनाना चाहता है अस्पताल
पार्षदों
ने डीसी से कहा कि थापर ग्राउंड में पहले हमें बताया कि यहां पर पार्क
बनाया जा रहा है। इसके लिए कोई सामाजिक संस्था 50 लाख रुपये डोनेशन दे रही
है। लेकिन बाद में पता चला कि यहां पर शहर के एक नामीगिरामी डॉक्टर अस्पताल
बनाना चाहता है। इसका नक्शा अधिकारियों की ओर से पास भी कर दिया गया है।
इसको लेकर जब हमने आवाज उठाई तो तब जाकर निर्माण कार्य बीच में रुका। लेकिन
अब फिर वहां पर निर्माण के लिए गटका डाला जा रहा है।