यमुनानगर। गर्मी के दिनों में मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए जिला मलेरिया विभाग ने बीमारियों का पता लगाने के लिए जिले में रैपिड फीवर सर्वे किया गया। 15 व 16 अप्रैल दो दिन सर्वे किया गया। जिसमें लोगों का डाटा जुटाया गया। सर्वे के अनुसार 520 लोग बुखार से पीड़ित मिले। इनमें सबसे ज्यादा लोग व्यासपुर में 121, साढौरा 90 व प्रतापनगर 78 हैं। विभाग की टीमों ने 11846 घरों में यह सर्वे किया गया है। विभाग ने सरस्वतीनगर, साढौरा, व्यासपुर, प्रतापनगर, छछरौली, नाहरपुर, रादौर और अर्बन एरिया में विजिट किया था।
विभाग मानसून सीजन से पहले मलेरिया व डेंगू पर की रोकथाम की तैयारियों में जुटा है। राहत की बात यह रही की स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया व डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला। किसी में इन बीमारियों का लक्षण भी नहीं दिखा। केवल सामान्य बुखार ही लोगों में पाया गया। सर्वे के दौरान लोगों से यह भी पूछा गया कि वह बुखार की दवा ले रहे हैं या नहीं। इसके अलावा दवाई कहां से ले रहे हैं।
मलेरिया के साथ-साथ डेंगू के भी काफी खतरनाक
मलेरिया के साथ-साथ डेंगू भी काफी खतरनाक है। अक्सर लोग जाने अनजाने में कई बार खाली बर्तन या टायरों को खुले आसमान के नीचे रख देते हैं। बारिश होने पर इनमें पानी भर जाता है। ऐसी जगहों पर ही मच्छर पनपते हैं। लोगों के घरों में रखे फ्रिज के पीछे बनी ट्रे और कूलर में रखे पानी में भी डेंगू का लारवा मिलता है। इसलिए विभाग घर-घर जाकर मच्छरों के लारवा की जांच भी कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब काफी होते हैं। जिनमें मच्छर पनपते हैं। इसके लिए जिला मलेरिया विभाग की तरफ से 502 तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी है। यह मछली मच्छर का लारवा खा जाती है।
वर्जन
बुखार, मलेरिया और डेंगू के मरीजों का पता लगाने के लिए विभाग ने रैपिड फीवर सर्वे किया गया। हमने दो दिन यह सर्वे किया गया है और आगे भी जारी रहेगा। लोगों को बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
-डॉ. सुशीला सैनी, डिप्टी सीएमओ एवं जिला मलेरिया अधिकारी, यमुनानगर।