संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दिवाली पर्व को लेकर इस बार स्टील व एल्युमिनियम की अपेक्षा पीतल व कांस्य (कांसे) बर्तनों की ज्यादा मांग बढ़ रही है। हालांकि पीतल व कांस्य के बर्तनों की कीमत ज्यादा है, इसके बावजूद लोग इन्हीं को खरीदना अधिक पसंद कर रहे।
कारोबारी विशेष सुंदर लाल के मुताबिक पीतल और कांसे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए सही माने जाते हैं और शरीर को आवश्यक खनिज (जैसे तांबा और जिंक) प्रदान कर करते हैं। जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, जहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही हैं। तकनीक में बदलाव आया है, लेकिन गुणवत्ता से साख बनी है। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं।
पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं। यहां से करीब 250 से ज्यादा इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं। इनमें 100 इकाइयां अरब देशों में काम कर रही हैं। जगाधरी की फैक्टरियों में बने बर्तनों की मांग विदेश में भी है। दिवाली के लिए लगातार ऑर्डर मिल रहे। ऐसे में कारोबारियों को इस बार 500 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। यमुनानगर की जगाधरी की फैक्टरियों में बने बर्तनों की गुणवत्ता ने देश-विदेश में इसकी मजबूत साख बनाई है। यहां बने स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन करीब 12 से ज्यादा देशों में भेजे जाते हैं। इनमें सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कई देश शामिल हैं।
वहीं, यहां से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात सहित दक्षिण भारत के राज्यों में बर्तन भेजे जाते हैं।