यमुनानगर। गांव स्यालबा के पास दो फरवरी की रात पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किए गए खेड़ा मुहल्ला जगाधरी निवासी अरुण से शुक्रवार को पुलिस ने निशानदेही कराई। वह लंगड़ाते हुए पुलिसकर्मियों के सहारे पहुंचा। निशानदेही के दौरान अरुण ने कहा कि गैंग के झांसे में आकर उससे बड़ी गलती हो गई।
वह करीब छह महीने पहले मोनू गुर्जर गैंग के संपर्क में आया था। गैंग की ओर से उसे पैसों और रसूख का लालच दिया गया। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि यदि वारदात के बाद वह जेल गया तो उसे बाहर निकलवा लिया जाएगा। पुलिस के अनुसार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला शामली के गांव जैनपुर निवासी अरुण कुमार ने 24 जुलाई को जगाधरी के लठमार मुहल्ले में अपनी मौसी के घर में घुसकर फायरिंग की थी।
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इस मामले में उसे 23 दिसंबर को जमानत मिली थी। जमानत पर बाहर आने के बाद ही वह कथित तौर पर गैंग के संपर्क में सक्रिय हो गया। दो फरवरी को अरुण किसी वारदात की फिराक में घूम रहा था। इसकी सूचना सीआईए-टू टीम को मिली। टीम ने उसे गोलनी के पास घेर लिया। खुद को घिरता देख उसने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। एक गोली एसआई रोहण को लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने से वह सुरक्षित बच गए। इसके बाद अरुण ने भागने का प्रयास किया और स्यालबा के पास अंडरपास से छलांग लगा दी। छलांग लगाने से उसकी टांग टूट गई। घायल अवस्था में ही पुलिस ने उसे काबू कर लिया।
उसके खिलाफ थाना छप्पर में मामला दर्ज किया गया। घटना के बाद से उसका इलाज चल रहा था। अब पुलिस रिमांड के दौरान उससे गैंग के अन्य गुर्गों और संभावित वारदात के बारे में पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और गैंग नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।