व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी अनुपमा भारती ने बताया कि भारतीय संस्कृति सदा से ही संतों के तप, त्याग और कृपा से पोषित होती रही है। इस धरा पर चारों युगों में मानव जीवन के उत्थान में संत समाज का बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि वास्तविकता में संत समाज संपूर्ण मानवता के लिए एक वरदान है जिसका संग केवल परमात्मा की कृपा एवं पूर्व जन्म के पुण्य पुंज द्वारा ही हो सकता है। आगे साध्वी जी ने विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि जब परमात्मा एवं प्रकृति किसी जीव को आत्मिक उत्थान के लिए चुन लेते हैं तब उसके जीवन में संत का पदार्पण होता है।
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उन्होंने कहा कि पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ संत अपने तपोबल एवं कृपा के द्वारा जीवात्मा का उत्थान करके उसे जन्म मरण के चक्रव्यूह से सदा के लिए मुक्त करने में समर्थ हैं परंतु संत समाज से केवल वे जन ही लाभान्वित हो पाते हैं जो अपना मिथ्या अहंकार त्याग कर उनकी शरणागति होकर पूर्ण निष्ठा, श्रद्धा एवं विश्वास से गुरु आज्ञा में रहते हुए अपने जीवन को परोपकार एवं समाज कल्याण हेतु लगाते हैं।
उन्होंने बताया कि साधारण से दिखने वाले नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद और मुकुंद से योगानंद परम हंस को बनाने वाले संत ही थे जिनके कारण आज इनका नाम इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। जब मनुष्य अपने जीवन की बागडोर शिवाजी की तरह समर्थ गुरु रामदास के हाथों में सौंप देता तो वह साधारण मनुष्य से एक विशेष व्यक्तित्व बन जाता है। एक दासी पुत्र को चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य बनाकर इतिहास में अमर कर दिया।