संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। डेरा गुरु नानक दरबार साहिब गुरुद्वारा मानीपुर में बाबा दीप सिंह के प्रकाशोत्सव पर नौवां वार्षिक समागम का आयोजन किया गया। समागम में दरबार साहिब को आकर्षक व सुंदर ढंग से सजाया गया। कर्मजीत सिंह रागी जत्था ने संगीतमय शब्द कीर्तन गाकर संगत को निहाल किया।
प्रचारक बाबा अवतार सिंह ने सिख इतिहास के बारे में जानकारी दी। समागम में गुरमीत सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। गुरुद्वारा सेवादार ज्ञानी सोहन सिंह ने गुरमीत सिंह व सरपंच गुरमेल सिंह सहित अनेक गणमान्य संगत को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। ज्ञानी सोहन सिंह ने कहा कि बाबा दीप सिंह जी सिखों के बीच सिख धर्म में सबसे पवित्र शहीदों में से एक अत्यधिक धार्मिक व्यक्ति के रूप में सम्मानित है।
उन्हें उनके बलिदान और सिख गुरुओं की शिक्षाओं के प्रति समर्पण के लिए याद किया जाता है। बाबा दीप सिंह मिसल शहीद तरना दल के पहले प्रमुख थे। गरोवल के युद्ध में बाबा दीप सिंह एक हथेली पर अपना सिर धर और दूसरे में तलवार लेकर रणक्षेत्र में लड़ते रहे और जान रहने तक सिख धर्म पर आंच नहीं आने दी। रणभूमि में उनके कौशल को देखकर भयभीत होकर दुश्मन भाग खड़े हुए।
बाबा दीप सिंह ने अफगान सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर की अपवित्रता का बदला लेने की कसम खाई थी। 1757 में उन्होंने स्वर्ण मंदिर की रक्षा के लिए एक सेना का नेतृत्व किया।उन्होंने कहा कि धरती का कोई गुण ऐसा नहीं, जो बाबा दीप सिंह में न हो। संतोष, सहज, संत, सिपाही, विनम्रता सहित सभी गुण थे। समागम में लंगर का आयोजन किया गया। इस मौके पर सरपंच गुरमेल सिंह, दर्शन सिंह, सतनाम सिंह, दौलत सिंह, गुरमेल सिंह , जसवंत सिंह, चरण सिंह, गुरमीत सिंह मौजूद रहे।