संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री गुरुद्वारा दसवीं पातशाही में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। मौके पर दीवान साहब आकर्षक ढंग से सजाया गया। कार्यक्रम में बलदेव सिंह कायमपुर, सरपंच प्रतिनिधि पंकुश खुराना ने मुख्य रूप से शिरकत की।
हजूरी रागी ढाडी जत्थों द्वारा शबद कीर्तन गाकर संगत को निहाल किया गया। बलदेव सिंह ने कहा कि सिखों में एकता पैदा करने के लिए उन्होंने बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की। गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा को अपने नाम के अंत में सिंह शब्द लगाने का विधान किया।
बलदेव सिंह ने कहा कि सिख इतिहास कुर्बानियों से भरा रहा है। गुरु गोविंद सिंह ने धर्म के लिए अपने समस्त परिवार का बलिदान कर दिया। वह एक महान आध्यात्मिक गुरु, योद्धा, दार्शनिक, और कवि थे। गुरु गोविंद सिंह कई ग्रंथों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। संत सिपाही भी कहा जाता था। गुरु गोबिंद सिंह जी प्रतिदिन आनंदपुर साहिब में आध्यात्मिक आनंद बांटते थे।
उन्होंने मानव को सही राह दिखाकर नैतिकता, निडरता व आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया था। श्री गुरु गोबिंद्र सिंह जी निष्ठावान, धर्म प्रर्वत्तक, सशक्त समाज सुधारक, क्रांतिकारी, लोक नायक, साहसी योद्धा और आशावादी राष्ट्र नायक थे। सेवा, त्याग, सदाचार के द्वारा सत्य की उपलब्धि को जीवन का चरम लक्ष्य मानने वाले सिखों में उन्होंने वीर भावना का संचार किया। वहीं, प्रधान करनैल सिंह व कमेटी सदस्यों की तरफ से मुख्य अतिथियों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जसपाल सिंह भठ्ठी, अमरीक सिंह, बलकार सिंह,पूर्व सरपंच चंद्रमोहन कटारिया, गुरमीत कौर सोढ़ी,सरदार सिंह, मा. हरिन्द्र सिंह,रिंकू, बाबा लाडी कार सेवा वाले सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।