जगाधरी। ग्रामीण अंचल में जहां कभी बेटियों का घर से निकलना भी चुनौती था, वहां आज फुटबॉल के मैदान में जूतों की गूंज और गोल की गूंज सुनाई दे रही है। इस बदलाव के पीछे कोच नरेश डौडियाल का जुनून है, जिसने न केवल समाज की सोच बदली, बल्कि लड़कियों के हाथों में फुटबॉल थमाकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। फर्कपुर कॉलोनी निवासी कोच दामला में लड़कियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
कोच नरेश ने बताया शुरुआती दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में महिला फुटबॉल के प्रति काफी हिचकिचाहट थी। उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित किया और उन्हें बेटियों के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा दिलाया। उनसे प्रशिक्षण लेकर जिले की पांच लड़कियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उनसे प्रशिक्षित 50 से ज्यादा खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर चुकी हैं।
इसके अलावा कई ऐसे हैं जो खेल के बल पर विभिन्न विभागों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं और कई कोच बनकर दूसरों की राह आसान बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सुमित जय पासी, राकेश कुमार, पंकज चुघ, आदित्य कुमार, आशु, हरिंद्र सिंह, शुभम पासी, उमेश थापा, अजय गुलेरिया कई सहित कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर नाम चमका चुका हैं।
भारतीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान मनप्रीत कौर की सफलता स्वर्णिम अध्याय हैं। मनप्रीत ने फुटबॉल की बारीकियां कोच नरेश डौंडियाल से ही सीखीं। मनप्रीत बताती हैं कि कोच नरेश के मार्गदर्शन और कठिन प्रशिक्षण ने ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार किया। समता धीमान, ऋचा पराशर, सुरिंद्र कौर, सोनिया भी अंतरराष्ट्रीय स्तर खेलकर नाम रोशन कर चुकी हैं। संवाद
अभी और भी हैं लक्ष्य : नरेश
कोच नरेश का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल खिलाड़ियों को मैदान तक लाना नहीं, बल्कि उन्हें विश्व स्तर का खिलाड़ी बनाना है। वे चाहते हैं कि स्लम एरिया और डेहा बस्ती में रहने वाले लड़के-लड़कियां भी फुटबॉल खेलें। इसके लिए उन्होंने प्रयास किए और अभी भी जारी हैं। उन्होंने कहा हमारी बेटियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और थोड़े से प्रोत्साहन की जरूरत है। उनकी एकेडमी में लड़कियां सुनहरे भविष्य का सपना लेकर पसीना बहा रही हैं।