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Yamuna Nagar News: पीने लायक नहीं शहर का पानी कैंपर खरीदना लोगों की मजबूरी

Mon, 12 Jan 2026 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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कैंपर के पानी के सैंपल लेते कर्मचारी। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। शहर में पीने के पानी की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। अधिकतर इलाकों में सप्लाई हो रहा पानी न तो स्वाद में ठीक है और न ही स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतर रहा है। हालात यह हैं कि लोगों ने नल के पानी पर भरोसा छोड़कर कैंपर वाला पानी को ही पीने का विकल्प बना लिया है।
शहर के अधिकांश मोहल्लों, कॉलोनियों और रिहायशी क्षेत्रों में अब रोजाना कैंपर से पानी की सप्लाई हो रही है। बड़े कैन, जार और बोतलों के जरिए हजारों लीटर पानी प्रतिदिन घर-घर पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर फिल्टर्ड पानी के करीब 250 सप्लायर हैं। ये सप्लायर कॉलोनियों, बाजारों, कार्यालयों और संस्थानों में नियमित रूप से पानी की सप्लाई कर रहे हैं। सुबह से देर शाम तक पानी से भरे वाहन सड़कों पर नजर आते हैं, जो बढ़ते कारोबार की तस्वीर खुद बयां करते हैं।
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वहीं जनस्वास्थ्य की रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो चौकाने वाले हैं। सरकारी स्तर पर कराई गई जांच रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है। अप्रैल 2025 से 9 जनवरी 2026 तक के नौ माह की अवधि में जिलेभर से कुल 7,298 पानी के सैंपल जांच के लिए लिए गए। इनमें से कई सैंपलों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व पाए गए हैं। खासतौर पर बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में 292 सैंपल फेल होना प्रशासन और आम लोगों, दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि लैब में हाल ही में कराई गई जांच में ट्यूबवेलों के पानी का टीडीएस स्तर 100 से 300 के बीच पाया गया है, जिसे निर्धारित मानकों के अनुरूप माना जा रहा है। इसके बावजूद बैक्टीरियोलॉजिकल स्तर पर खामियां सामने आने से लोगों की चिंता कम नहीं हो रही।
हालांकि बोतलबंद पानी पर हर महीने अच्छा-खासा खर्च करना पड़ता है, फिर भी लोग इसे मजबूरी मानकर स्वीकार कर रहे हैं। नागरिकों की मांग है कि जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार किया जाए और नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच हो, ताकि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके। जब तक नल का पानी भरोसेमंद नहीं होगा, तब तक बोतलबंद पानी का यह कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
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हमारी टीम हर माह आरओ के पानी के सैंपल लेते हैं। सैंपल लोकल लैब में टेस्ट होते हैं। जिनके पानी में दिक्कत आती है उन्हें नोटिस भी दिए जाते हैं, बकायदा मौके पर जाकर उनकी सफाई भी चेक की जाती है। -डॉ. वागीश गुटेन, जांच अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।
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