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Yamuna Nagar News: मंदिरों में गूंजते रहे जय माता दी के जयकारे

Fri, 26 Sep 2025 03:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर

सार

जगाधरी में नवरात्रि के दौरान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त मां की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। इससे शहर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
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देवी भवन मंदिर में दीपदान करतीं युवती व बच्चा। संवाद
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विस्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्तों में मां की पूजा का उत्साह ऐसा है कि कपाट खुलते ही मंदिरों में भक्तों का पहुचाना शुरू हो जाता है। वीरवार को तृतीय तिथि पर मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। मां की आराधना के लिए तड़के ही मंदिरों में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। इस दौरान जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे।
मंदिरों में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आने लगे थे। मंदिरों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका। मां को धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। भक्तों ने पूजा कर मां से सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। भक्तों ने मां की आरती की और जोरदार जयकारे लगे। शुक्रवार को मां के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्माण्डा की पूजा का विधान है।
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पुजारियों के अनुसार मां का यह रूप ममता व करुणा का प्रतीक है। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की पूजा की। इस दौरान जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
पंडित रमन शर्मा ने बताया कि नवरात्र के चौथे दिन कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। भगवती पुराण में कहा गया है कि मां कुष्माण्डा की पूजा करने से ज्ञान व शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां ज्ञान, इच्छाशक्ति, और कर्म का मिश्रण हैं। उन्होंने बताया कि मां का स्वरूप बेहद ममतामयी है।
उन्होंने कहा कि इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थित होता है, इसलिए भक्त को अत्यंत पवित्र और निश्छल भाव से देवी का ध्यान कर पूजा करनी चाहिए। अपनी मंद और कोमल मुस्कान से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड की सृष्टि करने के कारण इन्हें कुष्माण्डा कहा जाता है। जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने ब्रह्माण्ड की रचना की थी।
कुष्माण्डा देवी सृष्टि की आदि-शक्ति मानी जाती हैं। इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व ही नहीं था। देवी का निवास सूर्य मंडल के भीतर माना जाता है। यह शक्ति केवल उन्हीं के पास है कि वे सूर्यलोक में स्थित रह सकें। इनके शरीर की आभा स्वयं सूर्य के समान है। अन्य कोई देव या देवी इनके तेज की तुलना नहीं कर सकता।
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दसों दिशाएं उनके ही प्रकाश से आलोकित होती हैं। मां कुष्माण्डा की पूजा करने से भक्तों को बल, बुद्धि, यश-कीर्ति सहित समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि मां कुष्माण्डा की पूजा के लिए पहले उनकी मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मां कुष्माण्डा को बेला का फूल और अक्षत अर्पित करें। दीप और धूप दीप और धूप जलाएं और मां कुष्माण्डा की आरती करें। मां को मालपुआ, पेठा, दही या हलवे का भोग लगाएं।
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