जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने कहा कि गुरु कृपा का वास्तविक लाभ उसी शिष्य को मिलता है, जो अपने जीवन में पुरुषार्थ के लिए निरंतर तत्पर रहता है।
उन्होंने कहा कि केवल गुरु की कृपा की प्रतीक्षा करना पर्याप्त नहीं है। गुरु की शिक्षाओं को जीवन में उतारने के लिए साधना, अनुशासन, सेवा और सद्कर्मों का निरंतर अभ्यास जरूरी है। गुरु कृपा उस प्रकाश की तरह है, जो मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रकाशित करती है, लेकिन उस मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास शिष्य को स्वयं करना पड़ता है। साध्वी ने कहा कि जिस प्रकार अन्न, जल इत्यादि ग्रहण करने के लिए पात्र की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार गुरु भी अपनी कृपा के पात्र की तलाश करते हैं। संवाद