अफसरशाही इतनी हावी हो गई है कि वह सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और सरकार के आदेशों की अवहेलना करने पर लगे हैं। लगातार हरे-भरे पेड़ों पर विकास के नाम पर काटा जा रहा है। कई पेड़ों के ठूंठ बनाकर कुछ दिन रोका जा रहा है और उसके बाद उन पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। सोमवार को भी सरकारी ट्यूबवेल पर लगे तीन हरे पेड़ों को काट दिया। ग्रीनमैन प्रोफेसर एसएस सैनी ने इसकी शिकायत मेयर और कमिश्नर को की है। हरियाणा एनवायरमेंट सोसायटी के अध्यक्ष ग्रीनमैन प्रोफेसर एसएल सैनी ने मेयर मदन सिंह चौहान और कमिश्नर को हरे भरे पेड़ों को काटे जाने की शिकायत दी है। उन्होंने कहा कि लगातार विकास के नाम पर सड़क किनारे और पार्कों में लगे पेड़ों को काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों की अवहेलना है, जो लगातार पेड़ों को काटा जा रहा है। इसी प्रकार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलती रही तो पर्यावरण दूषित हो जाएगा। वैसे भी हजारों फैक्ट्रियों के कारण जिले का पर्यावरण पहले ही दूषित रहता है। यदि ऐसे ही पेड़ों को काटा जाता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हमें सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।
हरे पेड़ों को इस तरह से नहीं काटा जा सकता
एचईएस संस्था के अध्यक्ष ग्रीनमैन प्रोफेसर एसएल सैनी ने बताया कि शहर में विकास कार्य के नाम पर हरियाली पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हरे-भरे पेड़ काटने के पीछे निगम अधिकारियों के अलावा कोई और है जिसकी शह पर यह हो रहा है। हरे पेड़ों को इस तरह से काटना सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों की अवहेलना है। इस जगह पर लगे पेड़ों को न काटने का फैसला हुआ था। निगम अधिकारियों ने भी कहा था कि जहां पर पेड़ है वहां पर इस तरह से डिजाइन बनाया जाएगा कि पेड़ काटना न पड़े। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रविवार को भी पेड़ काटे जा रहे थे, जोकि हरियाली को खत्म करने वाला काम है।