खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार मिटाने और काम में तत्परता लाने के लिए सरकार ने तीन साल पहले मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल लांच किया था, लेकिन तकनीकी सिस्टम की खामियों का कुछ आढ़तियों ने फायदा उठा लिया और फसल रजिस्ट्रेशन से लेकर टोकन विड्राल, जमीन वेरिफाई करने और फसल बेचने तक के बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दे दिया। अब जब पंजीकरण की सच्चाई सामने आई तो हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है। एनआईसी की जांच में सामने आया है कि पोर्टल खुलते होते ही चालाक सौदागरों ने पंचायती रकबे, यमुना की जमीन और वक्फबोर्ड की जमीन पर धान की फसल का पंजीकरण करवा लिया। ऑटोमेटिक तस्दीक होने की वजह से उस वक्त मामला पकड़ में नहीं आ सका। प्रशासन द्वारा जांच हुई तो इस और बड़ा राज खुल सकता है।
फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने जिले के करीब एक दर्जन गांवों की जमीन को निशाना बनाया। इनमें आधे से ज्यादा गांवों के नाम एफआईआर में गलत लिखे गए हैं। जिन गांवों का जिक्र किया गया है उनमें अराईयावाला, मीर मद्दीपुर, जैदपुर, हैदरपुर, फकीर माजरा, असगरपुर, पंजोखरा के नाम तो ठीक लिखे गए हैं। इन गांवों की राज्य सरकार, केंद्र सरकार, पंचायती और बंजर भूमि के रकबे का पंजीकरण किया गया।
जमीन का फर्जी पंजीकरण करने वालों की बढ़ी टेंशन
जिन लोगों ने पोर्टल पर पंजीकरण करवाकर धान बेच दी। अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है तो वे अंडरग्राउंड हो गए हैं। इनमें प्रतापनगर अनाज मंडी के आढ़तियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रथम दृष्टया जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि दरअसल इस मंडी में जितनी धान बेची गई है, उसके मापदंडानुसार जमीन है ही नहीं। इतना ही नहीं इतने रकबे में तो धान यहां लगाया ही नहीं गया था। जिससे सरकार की पारदर्शिता मजाक बनकर रह गई है।
तीन लाख क्विंटल ज्यादा धान खरीदी गई
इस फर्जीवाड़े का केंद्र बनी प्रताप नगर अनाज मंडी में इस बार करीब तीन लाख क्विंटल ज्यादा धान खरीदी गई है। पिछले साल जहां करीब साढ़े 14 लाख क्विंटल धान खरीदी गई थी। वहीं इस बार साढ़े 17 लाख धान की खरीद हुई है। मार्केटिंग बोर्ड के सचिव अवतार सिंह का कहना है कि इस बार दूसरे राज्यों के किसानों को भी धान बेचने की छूट दी गई थी। ज्यादा खरीद की यह भी एक वजह हो सकती है
-जिला राजस्व अधिकारी अभिषेक ने बताया कि पंचायती रकबे पर फर्जी रजिस्ट्रेशन करके धान बेचा गया है। पुलिस द्वारा मामले के आरोपियों को पकड़ा जाएगा। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
- शुरुआत में मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में किसानों को काफी दिक्कतें आई थीं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान की गई। जिसका फायदा कुछ जालसाज ने उठा लिया। लोकल स्तर पर इसका कोई कंट्रोल नहीं है और चंडीगढ़ हेड क्वार्टर से ही है ऑपरेट की जाती है। - डॉ. सुरेंद्र यादव, कृषि उपनिदेशक