संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। खंड के गांव मुगलवाली में सरस्वती रामलीला क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में पहले दिन श्रवण कुमार लीला, नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। श्रवण कुमार के प्रसंग की लीला का मंचन देखकर भावुक हो गए। लीला मंचन में दिखाया गया कि पितृ भक्त श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को तीर्थाटन के लिए ले जाते हैं। रास्ते में प्यास लगने के कारण वह जल लेने जाते हैं। उसी समय राजा दशरथ भी शिकार के लिए गए होते हैं। श्रवण कुमार जब जलपात्र में जल भर रहे होते हैं तो दशरथ को लगता है कि कोई हिरण पानी पी रहा है। वे शब्द भेदी बाण चला देते हैं। इसके लगने से श्रवण की मृत्यु हो जाती है। वहीं दुखी होकर श्रवण कुमार के माता-पिता दशरथ को पुत्र वियोग में मरने का श्राप देते हैं। श्रवण कुमार को बाण लगने से पंडाल में मौजूद जनता की आंखें भर आती हैं। नारद मोह लीला में के मंचन में दिखाया गया कि नारद जी भ्रमण करते हुए एक स्थान पर पहुंचते हैं और ध्यान लाकर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से इंद्र का सिंहासन हिल उठता है। जिससे वह भयभीत होकर कामदेव तथा अप्सराओं को नारद मुनि की तपस्या भंग करने भेजते हैं। लेकिन कामदेव तथा अन्य अप्सराएं उनकी तपस्या को भंग नहीं कर पाते और काम देव त्राहिमाम कहते हुए नारद मुनि के चरणों में गिर पड़ते हैं।
नारद मुनि को लगता है कि उन्होंने बड़ा काम किया है। इससे उन्हें अभिमान आ जाता है। विष्णु, नारद मुनि के अभिमान को तोड़ने के लिए लीला रचते हैं। नारद मुनि को विवाह करने की इच्छा होती है । वे विष्णु से हरि रूप मांगते हैं। वे कहते हैं कि मैं वही काम करूंगा जो तुम्हारे हित में होगा और वे उन्हें वानर का रूप प्रदान करते हैं।
इससे वे स्वयंवर में हंसी का पात्र बन जाते हैं और भगवान विष्णु राजकुमारी से विवाह कर लेते हैं। इससे नारद जी क्रोधित होते हैं और वे विष्णु को श्राप देते हैं कि एक दिन तुम भी नारी के लिए तड़पोगे और तब ये वानर रूप जो आपने मुझे दिया है वे तुम्हारे काम आएंगे। इस मौके पर प्रधान जसबीर सिंह, महिंद्र सिंह ,माेकम सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।