संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आर्य समाज मंदिर मॉडल टाउन में 13 से 15 फरवरी तक महर्षि दयानंद सरस्वती का 202वां जन्म एवं बोध महोत्सव श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन रविवार को यज्ञ और भजन-प्रवचन के साथ हुआ। 16 फरवरी को प्रभात फेरी निकाली जाएगी।
समापन समारोह की शुरुआत प्रातः पूर्णाहुति यज्ञ से हुई। इसे आर्य समाज के पुरोहित पंडित सुरेश आर्य और उनकी धर्मपत्नी ज्योति आर्य ने विधि-विधान से संपन्न कराया। इसके बाद सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रातः रास में भाग लिया। अंतिम चरण दोपहर लगभग दो बजे तक चला। विरेंद्र शास्त्री ने प्रवचन के माध्यम से मानव जीवन में यज्ञ के महत्व और मुक्ति प्राप्ति का मार्ग बताया। उन्होंने महर्षि दयानंद के जीवन और उनके सामाजिक सुधारों पर भी प्रकाश डाला।
महर्षि दयानंद ने समाज में व्याप्त बुराइयों का विरोध किया और नारी शिक्षा, सती प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया। भजन उपदेशक सुमित्रा अंगिरा ने भजनों के माध्यम से उपस्थित लोगों को भावपूर्ण कर दिया। मंच का संचालन मंत्री यश वर्मा ने किया। आर्य समाज के संरक्षक रमेश पाहुजा ने महर्षि के मिशन को आगे बढ़ाने पर अपने विचार रखे।
महिला विंग आर्य समाज की प्रधान सुदेश चड्ढा ने सभी को प्रेरित किया कि ऋषि के कार्य को पूर्ण करने और उनके मिशन को आगे बढ़ाने में सहयोग दें। समारोह के अंत में आर्य समाज के प्रधान रविंद्र पाहुजा ने महर्षि दयानंद को युग प्रवर्तक बताते हुए उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम का आर्य समाज के 10 नियमों का वाचन और शांति पाठ के साथ समापन किया गया। समापन के बाद सभी श्रद्धालुओं ने लंगर में भोजन ग्रहण किया।
आर्य समाज मंदिर में उपस्थित श्रद्धालु। प्रवक्ता