संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के छठे दिन प्रवचन के दौरान साध्वी सुचेता महाराज ने भाषा समिति के विषय में विस्तार से बताया। भगवान महावीर स्वामी ने चार प्रकार की भाषाओं का वर्णन किया है । सत्य भाषा , असत्य भाषा, मिश्र भाषा, व्यवहार भाषा।
उन्होंने बताया कि कभी भी इतना सत्य नहीं बोलें की दूसरे का रहस्य बाहर आ जाए। दूसरे के लिए दुख परेशानी का कारण बन जाए। असत्य भाषा में बताया कि कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। मिश्र भाषा के बारे में बताया कि कभी भी मिश्र भाषा यानि मिली जुली भाषा न बोलें।
उन्होंने कहा कि व्यवहार भाषा में बताया कि समय को देखकर उपयोगी भाषा बोलें, सही भाषा का प्रयोग करे। साध्वी ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि गजब भाषा का तीर घाव करें गंभीर। कभी-कभी हम सत्य बोलते हुए ऐसा कुछ कह जाते हैं जो दूसरे के हृदय को छलनी कर देता है। उसे सत्य का कोई भी लाभ नहीं है। दूसरी और यदि आप सत्य बोलेंगे तो सामने वाले को आप पर भरोसा नहीं होगा।
साध्वी ने बताया कि यदि उसे स्थिति में आप कभी सत्य भी बोलोगे तो आपकी छवि ऐसी बन चुकी होगी की सामने वाला सोचेगा कि आप झूठ ही बोल रहे हो। इसलिए भाषा की मर्यादा को निभाते हुए अपनी भाषा पर संयम रखते हुए समाज में आचरण करना चाहिए ताकि आपकी छवि पर भी आंच न आए और सामने वाला भी आपके बोलने का इंतजार करें न कि आपके चुप होने का।