मानसून में शहर को जलभराव की पीड़ा देने वाले नालों पर नगर निगम अफसरों का ध्यान नहीं है। हालांकि नालों की सफाई के लिए 1.42 करोड़ रुपये में टेंडर लगा दिए हैं, पर हर साल सफाई में अड़चन बनने वाले नालों पर किए कब्जे अब भी नहीं हटा पाए हैं। यह मुद्दा वार्डों के पार्षद सदन की हर बैठक में उठा चुके हैं, बावजूद इसके नालों से कब्जे हटाने की कार्रवाई नोटिस देने व कमेटियां गठित करने तक सिमटी है। यही लापरवाही मानसून में जलभराव के रूप में भारी पड़ सकती है, क्योंकि कब्जों के चलते नालों की सही सफाई नहीं हो पाती है।
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में छोटे-बड़े 61 नाले हैं। मुख्य नाला जगाधरी से यमुनानगर की दर्जनभर कॉलोनियों से होकर पश्चिमी यमुना नहर के किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में आ रहा है। इस नाले पर कई जगह स्थाई कब्जे हैं। निगम अफसरों ने गत वर्ष तैयार रिपोर्ट में नौ जगह कब्जे माने, जिनमें फैक्ट्री, मकान व दुकान भी नाले पर मिले थे, किंतु वार्ड-8 से पार्षद विनोद मरवाह, वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान का आरोप है कि अफसरों की रिपोर्ट गलत है, क्योंकि सही सर्वे करें तो नालों पर सैकड़ों जगह कब्जे मिलेंगे। जिनके कारण निगम या ठेकेदार के कर्मचारी स्लैब व पक्के निर्माण के नीचे नालों की सफाई नहीं कर पाते। इस तरह इन कब्जों वाले स्थानों पर नालों में काई व गंदगी जमा रहती है। कई जगह तो ईंट-मलबा गिरा मिलता है। खासकर बरसाती सीजन में अधिक पानी आने पर नालों की निकासी में बाधा बनती है और नाले ओवरफ्लो होकर साथ लगती गलियों-सड़कों में जलभराव करते हैं।
मानसून से पहले नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए अफसरों को निर्देश दे चुके हैं। साथ ही नालों पर किए कब्जों पर भी कार्रवाई होगी।
- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।