शादी के दस साल बाद वीरवार को गांव लापरा की सरूणा को एक साथ चार बच्चों का तोहफा मिला है। महिला के चारों बच्चे समय से पहले होने के बावजूद स्वस्थ हैं।
परिजन एक साथ घर में चार लड़के होने से खुश हैं। बच्चों का वजन कम होने के चलते डाक्टर ने महिला और बच्चों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया है, लेकिन डाक्टरों के अनुसार इसमें चिंता की कोई जरूरत नहीं है। महिला और सभी बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
लापरा गांव की सरूणा की डिलीवरी का समय आने में दो महीने पहले ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इस पर उसके ससुराल के सभी लोग घबरा गए।
आननफानन में उसे माडल टाउन के निजी अस्पताल लाया गया। डिलीवरी के दौरान सरूणा ने एक के बाद एक चार लड़कों का जन्म दिया।
एक साथ चार लड़कों को जन्म देने पर सरूणा के पति नसीम और परिजनों का खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
बच्चों का वजन महज एक-एक किलो होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें एहतियात के तौर पर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया है। इससे पहले भी बलौली की महिला को अप्र्रैल में तीन लड़के हुए थे।
छछरौली के गांव बलोली की महिला बलविंद्र ने 16 अप्रैल को एक साथ तीन लड़कों को जन्म दिया था।
डिलीवरी के बाद से तीनों बच्चे स्वस्थ हैं। उधर, सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट विजय दहिया का कहना है कि बच्चे स्वस्थ हैं। उन्हें पीजीआई भेजा गया है।
तीनों बच्चों का वजन कम है। एक साथ चार लड़कों का यमुनानगर में पहली बार जन्म हुआ है।