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Yamuna Nagar News: तापमान में उतार-चढ़ाव से गेहूं में पीले रतुआ का खतरा

Mon, 09 Feb 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर में लहलहा रही गेहूं की फसल। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में रविवार सुबह से ही मौसम साफ रहा और तेज धूप निकलने से लोगों को सर्दी से काफी हद तक राहत मिली। वहीं तापमान में उतार-चढ़ाव से किसान चिंतित हैं। उन्हें गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग लगने का खतरा सता रहा है।
सुबह से ही आसमान साफ रहने के कारण धूप खिली रही। जिले का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि धूप तेज रही, लेकिन दिनभर हवा चलती रहने से मौसम में हल्की ठंड का अहसास बना रहा। शनिवार को भी धूप निकली थी, लेकिन धूप इतनी तेज थी कि बाहर खड़े रहने पर लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा था।
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रविवार को स्थिति थोड़ी अलग रही। धूप के साथ हवा चलने से मौसम संतुलित बना रहा। दिन के समय लोगों ने हल्के गर्म कपड़ों में ही कामकाज निपटाया। पार्कों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और लंबे समय बाद लोग खुलकर धूप का आनंद लेते नजर आए। हालांकि मौसम में आए इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि दिन और रात के तापमान में बढ़ते अंतर से गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खासतौर पर पीला रतुआ बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में जिले में करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। किसान किसी भी तरह के रोग के लक्षण दिखने पर तुरंत विभाग को सूचित करें।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना व भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और रात में ठंड बनी रही तो फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञ अजीत कुमार ने बताया कि सोमवार को जिले में बादल उमड़ने की संभावना है। बादल छाने से तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है, जिससे मौसम में फिर से ठंड बढ़ेगी। यदि तापमान में कमी आती है तो इससे गेहूं की फसल को राहत मिलने की उम्मीद है।
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पीले रतुआ के प्रमुख लक्षण
रोग की शुरुआती अवस्था में गेहूं की पत्तियों पर हल्के पीले रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे पत्तियों पर धारियों के रूप में उभर आते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, पत्तियां अपनी ताजगी खोने लगती हैं। वे मुरझाकर कमजोर हो जाती हैं और उनका रंग फीका पड़ने लगता है। रोग के अधिक प्रभावी होने पर पत्तियों पर साफ-साफ पीली रेखाएं या धारियां बन जाती हैं, जिन पर पीले रंग का पाउडर भी नजर आता है। संक्रमित पत्तियां समय के साथ पूरी तरह सूख जाती हैं और गिरने लगती हैं। इससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है और दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। पीला रतुआ अत्यंत तेजी से फैलने वाला रोग है। यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो यह कुछ ही दिनों में पूरे खेत को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
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