संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। कलेसर वन्य जीव क्षेत्र में एक तेंदुए की मौत के बाद वन्य जीव विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का संभावित कारण कैनाइन डिस्टेंपर नामक संक्रामक वायरल बीमारी सामने आने पर विभाग ने संक्रमण के स्रोतों की पहचान और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए जंगल निरीक्षण शुरू कर दिया है।
वन्य जीव विभाग की टीम ने चिक्कन, बन्यावाला और शहजादवाला क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का नेतृत्व वन्य जीव मंडल अधिकारी पंचकुला वीरेंद्र गिल और सहायक वन संरक्षक (वन्य जीव) यमुनानगर राजेश माथुर ने किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार तेंदुए की मौत का संभावित कारण कैनाइन डिस्टेंपर पाया गया है। यह बीमारी सामान्यतः संक्रमित आवारा कुत्तों से वन्य जीवों में फैलती है और विशेष रूप से मांसाहारी वन्य जीवों के लिए घातक मानी जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या, उनकी स्वास्थ्य स्थिति तथा अन्य वन्य जीवों के व्यवहार पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कचरा स्थलों, जल स्रोतों और मानव-वन्य जीव संपर्क वाले क्षेत्रों का भी जायजा लिया। साथ ही हाल के दिनों में किसी अन्य वन्य जीव की असामान्य मौत या बीमारी की जानकारी भी एकत्र की गई, ताकि संक्रमण के संभावित फैलाव का आकलन किया जा सके।
सहायक वन संरक्षक राजेश माथुर ने बताया कि निरीक्षण के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी। रिपोर्ट के माध्यम से बीमारी के फैलाव के कारणों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। वन्य जीव विभाग का कहना है कि कलेसर क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि किसी वन्य जीव में बीमारी के लक्षण या असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।