संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सर्व शिक्षा अभियान के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सभी राजकीय विद्यालयों के अध्यापक अपने आसपास के लोगों को उनके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक करेंगे और बच्चों का घर घर जाकर दाखिला करेंगे।अभियान के तहत शनिवार को गांव करहेड़ा खुर्द के राजकीय उच्च विद्यालय के अध्यापकों ने तीन गांवों में घर-घर पहुंचकर अभिभावकों से बात की। दाखिला से वंचित रह गए बच्चों का एडमीशन किया।
हिंदी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा, पंजाबी अध्यापिका सुखिंद्र कौर, संस्कृत अध्यापिका रजनी शास्त्री, प्राथमिक शिक्षिका वंदना शर्मा व ईएसएचएम विष्णुदत्त ने करेड़ा खुर्द, बाग का माजरा और तिगरी गांवों में जनसंपर्क किया। फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों के वंचित रह गए बच्चों का दाखिला किया। उन्हें कोरोना वायरस से बचने के लिए उचित व्यवहार से अवगत करवाया। संसाधनों के अभाव में जो बच्चे ऑनलाइन शिक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, उनका मार्गदर्शन दिया।
तिगरी गांव के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पहुंचकर करेड़ा खुर्द के अध्यापकों ने दाखिला अभियान के बारे चर्चा की। अध्यापक मोहिंद्र कुमार, रेखा व विक्रम ने बताया कि कोरोना काल में उनका स्टाफ बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रयत्नशील है। अरुण कैहरबा ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षा के तहत व्हाट्सअप समूहों, गूगल मीट आदि माध्यमों से बच्चों को शिक्षा प्रदान करने की कोशिश की जा रही है। स्मार्ट फोन व इंटरनेट पैक के अभाव में बहुत से बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं।
बिना एसएलसी दाखिला करने का किया अनुरोध
शिक्षकों को निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने फीस के बारे बताया। उन्होंने कहा कि सरकार व विभाग के नियमों के विरुद्ध निजी स्कूल फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं। वहीं वैश्विक आपदा की घड़ी में भी पूरी फीस भरने का दबाव दे रहे हैं। अधिकांश लोगों का कोरोना व लॉकडाउन के कारण रोजगार चला गया है, वे फीस व शुल्क देने में असमर्थ हैं। वहीं स्कूल प्रबंधक बच्चों का भविष्य खराब करने की धमकी तक दे रहे हैं। उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिल करवाने की इच्छा जताई। अभिभावकों ने कहा कि अध्यापकों के सामने बिना एसएलसी के बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला करने का अनुरोध किया।