देवधर गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिंदी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा कविता और नाट्य के माध्यम से बच्चों को पाठ पढ़ाते हैं। सस्वर वाचन व गायन का विद्यार्थियों पर जादू-सा असर होता है। उनके द्वारा पढ़ाई गई कविताएं विद्यार्थियों के दिल में थिरकती हैं और जुबान पर गूंजती हैं। विद्यार्थी स्कूल व गांव में गाकर पाठ सुनाने लगते हैं और इस तरह से उन्हें हिंदी का काम याद रहता है।
अरुण कुमार की यह कला यू ट्यूब पर भी खूब देखी जाती है। उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें राज्य स्तरीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन अवार्ड से नवाजा गया है। भिवानी में आयोजित समारोह में विधायक घनश्याम सर्राफ ने उन्हें प्रशस्ति पत्र व मेडल देकर सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान नवाचारी हिंदी साहित्य शिक्षण एवं सामाजिक-शैक्षिक गतिविधियों के लिए दिया गया। प्रदेश भर में काम करने वाली विभिन्न सामाजिक-शैक्षिक संस्थाओं द्वारा यह पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष 17वें राज्यस्तरीय शिक्षक दिवस समारोह में हरियाणा के सभी जिलों से 51 अध्यापकों को यह पुरस्कार दिया गया। जिला यमुनानगर से अकेले अरुण कुमार को यह सम्मान मिला है।
विद्यार्थियों के पसंदीदा अध्यापक : हिन्दी प्राध्यापक के रूप में वे विद्यार्थियों के पसंदीदा अध्यापक हैं। वे कविताओं को आनंददायी ढंग से इस प्रकार पढ़ाते हैं कि विद्यार्थी उस रचना के साथ जुड़ जाते हैं। उनके द्वारा तन्मयता के साथ किए जा रहे और फिर खुद भी तुकबंदी करते-करते कवि-कवयित्री बन रहे हैं। इसी तरह गद्य विधाओं को भी वे विभिन्न तरीकों से पढ़ाने में यकीन करते हैं। कितनी कहानियों का वे नाट्य रूपांतरण करवा चुके हैं।
नए स्टाइल की पढ़ाई आ रही रास : वे बताते हैं कि परंपरागत रूप से पढ़ी-पढ़ाई कहानी विद्यार्थियों के लिए नीरस हो जाती है, जबकि उसी कहानी को नाट्य विधि से पढ़ाने पर वह कहानी जीवंत हो उठती है। अध्यापक व विद्यार्थियों की थोड़ी-सी मेहनत के बाद विद्यार्थी आत्मविश्वास से मंच पर आते हैं और कहानी के पात्रों की भूमिकाओं को जीने लगते हैं। उन्होंने बताया कि कहानी के नाट्य मंचन को देखकर अन्य विद्यार्थी भी लाभान्वित होते हैं। परीक्षा की उपयोगिता से भी आगे बढ़कर साहित्यिक रचनाएं जीवन को समझने का जरिया बन जाती हैं। यह विधि एवं प्रक्रिया विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाती है। कक्षा में सोये से रहने वाले विद्यार्थियों की प्रतिभा मंच पर झूमने और इतराने लगती है।
पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे बन रहे कवि : उन्होंने बताया कि कहानी, पटकथा, संस्मरण व रेखाचित्रों के नाट्य रूपांतरण व मंचन के जरिये विद्यार्थी विभिन्न विधाओं की रचना प्रक्रिया को भी जानते हैं और विभिन्न विधाओं के अंतर संबंधों को भी समझते हैं। उनके बहुत से विद्यार्थी कविता लेखन में कदम रख चुके हैं और अच्छी कविता रचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही साहित्य साधना में भी निरंतर अध्ययन और संघर्ष की जरूरत होती है। गांव-बस्तियों में पुस्तकालय होने पर यह प्रक्रिया तेज हो सकती है।
नए अध्यापकों के प्रशिक्षण में भी देते हैं योगदान : प्राध्यापक अरुण कुमार हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रशिक्षण प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा बनाए गए परमानेंट रिसोर्स समूह के सदस्य हैं। समय-समय पर अध्यापकों के प्रशिक्षण में भी अपना योगदान देते आए हैं। विभाग की पत्रिका शिक्षा सारथी में उनके लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। उन्होंने बहुत से चेतना गीत गाए हैं। उनकी खुद की लिखी कविताएं और गीतों को हजारों लोग यू-ट्यूब के माध्यम से सुन चुके हैं।
शिक्षक का सफर : सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार ने वर्ष 2002 में करनाल जिले के साक्षरता अभियान में जिला युवा एवं सांस्कृतिक समन्वयक के रूप में कार्य करने की शुरूआत की थी। उनके नेतृत्व में अनेक सांस्कृतिक टीमों व अध्ययन मंडलियों का गठन किया गया। सांस्कृतिक टीमों ने नाटकों, गीतों, कविताओं के माध्यम से गांव-गांव में सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया। साक्षरता अभियान के बाद उन्होंने अतिथि अध्यापक, विशेष अध्यापक और शिक्षण महाविद्यालय में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। कुछ साल उन्होंने हिंदी समाचार-पत्र में पत्रकारिता की। अगस्त 2012 में उन्होंने हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग में हिंदी प्राध्यापक के रूप में कार्य करना शुरू किया। फिलहाल वे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैंप यमुनानगर से उनका स्थानांतरण छछरौली खंड के गांव देवधर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हुआ।