संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग के पास रेडियोग्राफर न होने की वजह से व्यासपुर व प्रतापनगर सीएचसी में एक्सरे मशीन नहीं लग पाएगा।अब टीबी मरीजों की जांच के लिए सीबी नॉट मशीन खरीदी जाएगी। यदि विभाग में रेडियोग्राफर होते तो शायद अब तक दोनों सीएचसी में मरीजों को एक्सरे की सुविधा मिल गई होती। ऐसे में लोगों को एक्सरे के लिए उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी या फिर जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर के चक्कर काटने पड़ेंगे।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री खनिज कल्याण योजना के तहत जिला माइनिंग फंड (डीएमएफ) से जिले में स्वास्थ्य विभाग को 25 लाख रुपये मिबेने थे। इस राशि से सीएचसी व्यासपुर व प्रतापनगर में दो एक्सरे मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया था। ऐसे में लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी मरीजों को एक्सरे की सुविधा मिल सकेगी।
बाद में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के पास रेडियोग्राफर ही नहीं है। यदि मशीनें खरीद भी ली गई तो बिना रेडियोग्राफर के उन्हें चलाएगा कौन। यदि मशीनें खरीद भी ली जाती तो वह ऐसे ही पड़े-पड़े धूल फांकती रहती। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने एक्सरे मशीन की जगह टीबी मरीजों की जांच के लिए सीबी नॉट मशीन खरीदने का निर्णय लिया।
जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने डीसी से अनुमति ली है। अब यह फंड अन्य उपकरणों के लिए ट्रांसफर किया जाएगा। जिला माइनिंग फंड से विभिन्न विभागों को अलग-अलग मद में रुपये दिए जाते हैं। इसमें स्कूल, स्वास्थ्य विभाग से लेकर लोक निर्माण विभाग तक को निर्धारित फंड ट्रांसफर किया जाता है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग को भी इस फंड से 25 लाख रुपये मिले थे।
एक्सरे मशीनें लगती तो दोनों जगहों पर चार लाख की आबादी को फायदा मिलता। अभी दूरदराज के क्षेत्रों से मरीजों को एक्सरे के लिए जिला नागरिक अस्पताल या फिर जगाधरी में आना पड़ता है। पिछले दिनों जिला नागरिक अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन लगाई गई है। एक मशीन पहले से लगी है। ऐसे में यहां से त्वरित रिपोर्ट भी मिल रही है। अस्पताल में हर रोज एक्सरे के लिए लगभग 100 सक 140 मरीज पहुंच रहे हैं।
डीएमएफ से स्वास्थ्य विभाग को 25 लाख रुपये मिले हैं। इससे दो सीएचसी के लिए एक्सरे मशीन खरीदी जानी थी। परंतु विभाग के पास रेडियोग्राफर नहीं है। इसलिए डीसी की अनुमति से एक्सरे मशीन की जगह टीबी मरीजों की जांच के लिए सीबी नॉट मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया है। इससे ग्रामीण में भी टीबी की जांच हो सकेगी। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।