यमुनानगर। साल का पहला और सबसे लंबा सूर्य ग्रहण रविवार को लगा। ग्रहण के कारण सड़कों बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। मंदिरों व धार्मिक स्थलों के कपाट बंद रहे। कोरोना महामारी के कारण लोगों ने मोक्ष काल में पूजा और वैदिक अनुष्ठान घर पर रहकर ही किए। जिले में सूर्य ग्रहण की अवधि तीन घंटे 22 मिनट रही। यह सूर्य ग्रहण सुबह 10 बजकर 22 मिनट पर यमुनानगर में दिखाई दिया। ग्रहण पश्चिम में राजस्थान, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र होता हुआ यमुनानगर में दिखाई दिया। यहां के बाद सहारनपुर के बेहट, उत्तराखंड के देहरादून, जोशीमठ से होता हुआ पूर्व में समाप्त हो गया।
वलयाकार रहा सूर्य ग्रहण
जिले में वलयाकार सूर्य ग्रहण देखा गया। जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं। इस दौरान सूर्य की रोशनी कम हो गई। धूप चंद्र के आवरण को पार करके धरती पर पड़ी। धीरे धीरे ग्रहण पूर्ण होता गया और सूर्य का प्रकाश अपोल हो गया। शाम की तरह धूप गायब हो गई।
तीस सेकेंड के लिए चंद्रमा ने ढका सूर्य
वलयाकार सूर्य ग्रहण का पूर्ण आकार केवल तीस सेकेंड के लिए रहा। तीस सेकेंड के लिए चंद्रमा ने सूर्य को ढक लिया। इस दौरान सूर्य एक चमकते कंगन की तरह दिखाई दिया। यह नजारा बहुत ही कम लोग देख पाए। इसका जो चरम काल रहा वह तीन से चार सेकेंड रहा।
बाल वैज्ञानिकों ने उपकरणों से खगोलीय घटना का किया अवलोकन
सीवी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा के मार्गदर्शन में सूर्यग्रहण देखा। इस दौरान बाल वैज्ञानिकों पार्थवी, प्राची, रमन ढ़ींगड़ा, यश, नमन, सक्षम आहूजा, रितेश ओबराय, अंशवी ने अपने हाथों से बनाए 15 विभिन्न नवाचारी उपकरणों से दिखाया। कर्नाटका भारत ज्ञान विज्ञान समिति व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक ने इस कवरेज को देश के कार्यकर्ताओं के साथ लाइव साझा किया।
2031 में दिखाई देगा ऐसा ग्रहण
विशेषज्ञ दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि यह वलयाकार ग्रहण कई सालों में एक बार आता है। अब यह खगोलीय घटना 11 साल बाद होगी। 2031 में दोबारा भारत में इसी तरह का ग्रहण दिखाई देगा।