संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरस्वती शुगर मिल 16 नवंबर को शुरू हो जाएगा। इसके लिए मिल को 175 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य मिला है। इस बार गन्ने की कम पैदावार हुई है। इससे इस लक्ष्य पूरा करना बड़ी चुनौती है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल एक लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें से 18 हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की बिजाई होती है। भूमि के हिसाब से पैदावार ठीक है, किंतु बहुत से किसान ऐसे हैं जो गन्ने के रेट सही न मिल पाने पर दूसरी फसल उगाने पर लगे हैं। इससे इस बार गन्ने की पैदावार पिछले वर्ष के मुकाबले कम हुई है।
वहीं सरस्वती शुगर मिल शुरू होते ही किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गन्ने को लाना शुरू कर देंगे। ऐसे में ट्रॉली इधर-उधर ने हो इसके लिए पिलरों पर रोगन कर दिया गया और उन पर रेडियम टेप लगा दी गई। इसी जगह पर ही गन्ने की ट्रॉली की तौल होगी। तौल के दौरान गड़बड़ी न हो इसके लिए चार से पांच वर्करों की तैनाती रहेगी। इतना ही नहीं गन्ने लाने वाले किसानों का पर्ची सिस्टम रहेगा। उसी के आधार पर खरीद होगी। वहीं शुगर मिल में गन्ना आने के लिए जिला में 42 बिक्री केंद्र बनाए गए हैं। इन सेंटरों पर ही किसान अपना गन्ना गिराएंगे। इसके बाद यहां से सीधा मिल में ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गन्ना आएगा।
यहां की चीनी की दूर-दूर तक मांग
यमुनानगर की सरस्वती शुगर मिल एशिया के सबसे बड़ी मिल है। गन्ने की पेराई के बाद उसके रस का स्टॉक किया जाता है, जो चीनी बनाने के काम आता है। यहां की चीनी की पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल जगहों पर सप्लाई होती है।