संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मॉडल टाउन स्थित एसएस जैन सभा में चल रहे चातुर्मास के प्रवचन में महासाध्वी सुचेता महाराज ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी ने उत्तरा ध्ययान सूत्र के 24 वें अध्ययन में अष्ट प्रवचन माता का वर्णन किया है। जैसे एक माता बच्चे का पालन पोषण करती है, उसे अच्छे संस्कार देती है, ठीक उसी प्रकार हमारी ये धर्म की माता जिसे अष्ट प्रवचन माता कहते हैं, वो हमारे जीवन की रक्षा करती है।
उन्होंने कहा कि वो हमें जीना सिखाती है, हमें कैसे चलना, कैसे बोलना, कैसे हर क्रिया करना जिसने पाप कर्मों का बंधन न हो इसलिए भगवान ने हमें विवेक, यत्तना, संयम का मार्ग बताया जिससे हम पापों से बच सके। यदि व्यक्ति के मन से पाप और पुण्य अच्छे और बुरे धर्म और धर्म का डर निकल जाएगा तो उसके कर्मों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं रहेगा।
सुचेता ने कहा कि समाज एक ऐसी दिशा की ओर चला जाएगा जहां से समाज का वापसी करना संभव नहीं होगा धर्म हमें हर प्रकार की बुरी आदत और बुरे कर्मों से बचने के रास्ते पर लेकर चलता है जबकि अधर्मी आदमी समझ में घृणा का पात्र बनता है। यदि हम धर्म के मार्ग पर चलने का अपहरण करेंगे तो साथ ही साथ सील संयम तब तपस्या हमारे साथ चल देंगे।