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सब्सिडी वाली यूरिया खाद की गाड़ी पकड़ी

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subsidized urea manure caught - फोटो : Yamuna Nagar
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किसानों को खाद मिले या न मिले, लेकिन प्लाइवुड फैक्ट्रियों में यूरिया खाद की सप्लाई धड़ेल्ले से की जा रही है। सोमवार को भी एक फैक्टरी से यूरिया खाद के कट्टों से भरी एक पिकअप गाड़ी पकड़ी गई है। गाड़ी फैक्टरी पहुंच गई थी कि उसी समय थाना सदर यमुनानगर ने पहुंच कर गाड़ी काबू कर ली। पुलिस ने कृषि अधिकारियों को सूचना देकर शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है। लेकिन खाद किस फैक्टरी से पकड़ी गई है उसके बारे न तो पुलिस कुछ बता रही है और न ही कृषि अधिकारी कुछ बताना चाहते हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई शादीपुर स्थित एक प्लाइवुड फैक्टरी में की है। जब्त की गई पिकअप गाड़ी से 52 बैग यूरिया नीम कोटेड खाद के बरामद किए गए हैं। चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस सहित कृषि विभाग के अधिकारी मामले में जांच चल रही है कि बात कह रहे हैं।
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पिकअप गाड़ी देखकर ऐसा लगता है, जैसे इसमें यही काम किया जाता है। चूंकि गाड़ी का नंबर छिपा कर रखा गया था। गाड़ी के आगे तो नंबर ही नहीं लिखा था। लेकिन पीछे लिखे नंबर पर टेप लगा रखी थी, ताकि कोई नंबर न पढ़ सके। पुलिस ने टेप उतार कर गाड़ी का नंबर लिया है, जिसके आधार पर मालिक व चालक की तलाश की जा रही है।
प्लाइवुड फैक्ट्रियों में भारी मात्रा में यूरिया का प्रयोग किया जाता है। इससे प्लाई पत्ता को चिपकाने वाला गलू बनाया जाता है। फैक्ट्रियों में प्रयोग होने वाले टेक्निकल यूरिया की कीमत सरकार की ओर से 1300 रुपये रखी गई है। जबकि किसानों को सब्सिडी मिलती है। इसीलिए फैक्टरी संचालक चोरी करते हैं।
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फैक्ट्रियों में प्रयोग होने वाले यूरिया का बाजार में मूल्य करीब 13 सौ रुपये है। जबकि किसानों को 250 से 300 रुपये में यूरिया खाद का एक बैग मिलता है। सरकार की ओर से किसानों को एक बैग पर करीब एक हजार रुपये की सब्सीडी दी जाती है। फैक्टरी संचालक किसानों को मिलने वाली सब्सीडी चोरी कर रहे हैं।
कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों का कहना है कि पकड़ी गई गाड़ी फैक्टरी के अंदर थी। जिसे अधिकारी ही बाहर ले आए। वहीं इसमें मामले में पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज किया है। एफआईआर और शिकायत में फैक्टरी का जिक्र नहीं किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारी फैक्टरी संचालक को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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