संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही बुनियाद योजना की बुनियाद कमजोर होने लगी है। बुनियाद के लिए चयनित विद्यार्थी बीच में ही छोड़-छोड़कर जा रहे हैं। विद्यार्थी बुनियाद छोड़ने के लिए एसएलसी ले रहे हैं। बुनियाद छोड़ने का विद्यार्थी और अभिभावक विभिन्न कारण बता रहे हैं।
निदेशालय हर साल बुनियाद में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे रहा है, लेकिन हो इसके उलट रहा है। हर साल बुनियाद के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। दो साल में 10 प्रतिशत विद्यार्थी बुनियाद केंद्र छोड़ गए हैं। इस साल बुनियाद के लिए 176 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। पिछले साल यह संख्या 200 से ज्यादा थी।
इसका कारण बुनियाद योजना की खामियां और सुविधा मिलने में देरी बताया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों व अभिभावकों को परेशानी हो रही है। ऐसे में मजबूरन विद्यार्थियों को बुनियाद केंद्र से एसएलसी लेनी पड़ रही है। हालांकि इन्हीं परेशानियों से बचने के लिए विभाग की ओर से ओरिएंटेशन कार्यक्रम करवाया जाता है। जिसमें विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों को योजना के बारे बताया और जागरूक किया जाता है। इसका असर नहीं दिखाई दे रहा है।
अभिभावक व विद्यार्थी योजना के तहत आने-जाने के लिए मिलने वाले किराये में देरी वजह बता रहे हैं। केंद्र दूर होने के कारण आने-जाने में काफी किराया लगता है। योजना के तहत मिलने वाले किराये में पांच से छह महीने की भी देरी हो जाती है। विभाग की ओर से विद्यार्थियों के लिए चार रुपये प्रति किलोमीटर की दर से आने-जाने का किराया दिया जाता है। राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के लिए सरकार की ओर से बुनियाद योजना शुरू की गई है।
जिले में केवल पांच केंद्र
जिले में बुनियाद के केवल छह केंद्र चल रहे हैं। दो केंद्र यमुनानगर खंड में चल रहे हैं। एक-एक केंद्र रादौर, व्यासपुर, सरस्वतीनगर और छछरौली में है। छछरौली खंड में प्रतापनगर भी इसमें आता है। प्रतापनगर क्षेत्र से सटे हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बसे गांव भी छछरौली खंड में हैं। विद्यार्थियों को यहां से छछरौली आना-जाना प्रतिदिन 50 किमी तक पड़ता है। इसी तरह साढौरा में केंद्र नहीं है। विद्यार्थियों को व्यासपुर आना पड़ता है। व्यासपुर से साढौरा की दूरी करीब 20 किलोमीटर है।जठलाना में भी केंद्र नहीं है। यहां के विद्यार्थियों को रादौर जाना पड़ता है।
कुछ विद्यार्थियों ने बुनियाद केंद्र छोड़ा है। अभिभावकों ने इसके निजी कारण बताए हैं। लिखित रूप से सुविधा का भाव की शिकायत नहीं मिली है। केंद्र बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। - विशाल सिंघल, जिला विज्ञान विशेषज्ञ।