तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य।
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जगाधरी। एमबीबीएस की फीस वृद्धि व नीति के विरोध में वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान परिषद सदस्य नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थियों के हित में नहीं है। इस नीति से मेधावी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। केवल पूंजीपतियों के बच्चों को ही शिक्षा का अधिकार होगा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले कुलश, विकुल, अभिषेक, अंश वर्मा, गुरमीत, मयंक, राहुल, अभय, विशु मोंगा, मनीष कुमार ने कहा कि प्रदेश में इसकी आवश्यकता नहीं है। हरियाणा नागरिक मेडिकल सेवा कैडर लागू किया गया है। इसमें आवेदन करने वालों की संख्या सीटों से अधिक होती है, ऐसे में इस नीति की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी ऋण बॉन्ड के अनुसार पढ़ाई करता है तो वह बंधुआ बनकर रह जाता है।
12वीं पास 17 साल के विद्यार्थी को 37 लाख रुपये का ऋण देकर ब्याज सहित सात साल तक भुगतान लिया जाता है। जिसकी ईएमआई 60,000 रुपये प्रतिमाह बनती है। एमबीबीएस चिकित्सक के लिए हर माह यह चुकाना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस के लिए 40 लाख रुपये की नीति विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। इससे निम्न व मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चों का चिकित्सक बनने का सपना टूट जाएगा। केवल अमीरों के बच्चे ही चिकित्सीय शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। विद्यार्थी नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपने लघु सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान डीसी नहीं मिले। उनकी गैर मौजूदगी में तहसीलदार ने अभाविप का ज्ञापन लिया। प्रदर्शन में आशीष, अनीश, मनीष, हरितोष, मिक्की, अजेश, मयंक, प्रतीक सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे।