संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुनानगर डिपो में केवल बसें ही नहीं बल्कि चालक भी कम है। चालकों की कमी से काफी बसें रोडवेज वर्कशॉप में धूल फांक रही हैं और दूसरी तरफ स्कूल, कॉलेजों में जाने वाले विद्यार्थी रोजाना अपनी पढ़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खिड़की पर लटककर आना जाना छात्रों के लिए रोज की बात हो गई है।
इस वक्त रोडवेज में करीब 40 चालकों की कमी है। वहीं दूसरी तरफ परिचालकों की संख्या ज्यादा हो रही है। इसी कमी की वजह से रोडवेज चालकों पर काम का दबाव बढ़ गया है। चालकों की पहले ड्यूटी और फिर शाम को घर वापस जाने की होड़ में सड़कों पर हादसे हो रहे हैं।
रोडवेज में इस वक्त 283 परिचालक और 234 चालक हैं। वहीं बसों की संख्या केवल 150 ही हैं। इनमें से 130 से 135 बसें ही ऑनरूट रहती हैं। बाकी बसें सर्विस तो कभी अन्य मरम्मत कार्यों के चलते रोडवेज वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं। एक साल पहले तक यमुनानगर डिपो में 190 बसें थी। लगातार घट रही बसों से विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य सवारियां भी परेशान हैं।
बसों की कम संख्या होने के बाद भी रोडवेज के अधिकारी यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने की बातें करते हैं।नियमानुसार 265 बसों की डिपो में जरूरत है। यह कमी पूरी हो तब जाकर यात्रियों की समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। पुराने ड्राइवर जो लगे हुए हैं वह समय-समय पर रिटायर हो रहे हैं। इनमें से कुछ पदोन्नति पाकर क्लेरिकल या फिर अन्य कार्यों पर लग गए हैं।
छात्र बोले - लटक कर सफर करने पर मजबूर
कॉलेज छात्र संजीव, विशाल व प्रियांश ने बताया कि सबसे ज्यादा दिक्कत दोपहर के समय होती है। सुबह यमुनानगर डिपो से तो विभिन्न रूटों के लिए चलती हैं, लेकिन आने वाली बसों की संख्या बहुत कम है। दोपहर 12 बजे से लेकर साढ़े तीन बजे तक बहुत देर बाद बस काउंटर पर लगती है। बसों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है उनकी छुट्टी पौने दो बजे हो जाती है, लेकिन उन्हें घर पहुंचने में शाम के पांच बज जाते हैं। यदि बस हो तो वह घर समय पर पहुंच कर न केवल पढ़ाई कर सकते हैं, बल्कि अपने जरूरी कार्य भी निपटा सकते हैं। बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
यमुनानगर डिपो में बस, ड्राइवर व परिचालकों की कमी पूरी करने के लिए मुख्यालय को लिखा है। डिपो में इस वक्त 265 बसों की जरूरत है। इसी हिसाब से स्टाफ की मांग की गई है। - संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो।
यमुनानगर बस स्टैंड पर लगी लोगों की भीड़। संवाद