यमुननगर। फैक्टरियां ही नहीं बल्कि नगर निगम भी यमुना की धाराओं को गंदा करने में लगा हुआ है। औद्योगिक इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे नदी में गिर ही रहा है, वहीं नगर निगम का ठेकेदार हमीदा हेड पर शहर का कूड़ा रिसाइक्लिंग के नाम पर डंप कर रहा है।
एनजीटी (नेशनल हरित प्राधिकरण) के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है, हालांकि नगर निगम व ठेकेदार का दावा है कि रिसाइक्लिंग कर कूड़े को कैल प्लांट पर पहुंचाया जाता है। हैरानी की बात यह भी है कि वहां पर छोटे-छोटे बच्चे कूड़े में से पॉलिथीन व अन्य चीजों को अलग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर वार्ड 13 की पार्षद निर्मला चौहान कई बार डीसी, नगर निगम और सिंचाई विभाग की बैठक करा चुकी हैं, जिसमें कई बार नगर निगम ने नालों की निकासी और ठेकेदार को नोटिस देने के लिए कहा था। वहीं सिंचाई विभाग ने भी अपनी जमीन की चहारदीवारी करने को कहा था, लेकिन अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है।
प्रदूषण चाहे वायु, जल और ध्वनि हो, सभी मनुष्य के अलावा जीव-जंतुओं के लिए प्राणघातक साबित हो रहा है। हमीदा हेड के नजदीक यमुना किनारे पर लगभग 12 फैक्टरियां संचालित हैं, हालांकि लॉकडाउन लगने के कारण यह बंद हैं। ज्यादातर फैक्टरियों का वेस्ट पानी सीधे यमुना नदी और पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है। जबकि जानकारों की माने तो फैक्टरी में जल शुद्धीकरण के लिए इन्फ्यूजल ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगा होना चाहिए, लेकिन अधिकांश फैक्टरी में ईटीपी नहीं लगा हुआ है, उससे केमिकल युक्त पानी यमुना को प्रदूषित कर रहा है, वहीं सफाई का ठेका नगर निगम ने एक कंपनी को दिया है। कंपनी के कर्मचारी ट्रैक्टरों, टिपरों व अन्य संसाधनों से कूड़ा हमीदा हेड पर डाल रहे हैं। इसके बाद यहां पर कूड़े को रिसाइकिल किया जा रहा है। पार्षद निर्मला चौहान का कहना कि ठेकेदार थोड़ा बहुत कूड़ा रि-साइकिल कराता है और कम ही कूड़ा उठाकर कैल प्लांट ले जाता है। ऐसे में आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है। बारिश होने पर दुर्गंध होती है और संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन, सिंचाई विभाग व नगर निगम की फाइलों में छिपा है लोगों का दर्द
वार्ड नंबर 13 की पार्षद निर्मला चौहान का कहना है कि वह पिछले छह वर्षों से कूड़ा हटाने, पानी की निकासी और सिंचाई विभाग की जमीन की चहारदीवारी की मांग कर रही है। डीसी मुकुल कुमार और नगर निगम आयुक्त धर्मवीर सिंह भी यहां का निरीक्षण कर गए हैं और फाइल को आगे बढ़ाने को कहा गया। निर्मला चौहान का कहना है कि फाइलें कुछ ही कदम चलती और फिर वह बंद हो जाती हैं। अभी तक किसी भी कार्य को नहीं कराया गया।