संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बेसहारा कुत्तों सरकारी कार्यालयों में अपना स्थायी बसेरा बना लिया है। दिनभर बेसहारा कुत्ते सरकारी कार्यालयों में बैठे रहते हैं। कई बार तो कुत्तों के डर से शिकायतकर्ता कार्यालय के अंदर जाने की जहमत ही नहीं उठाते। कई कार्यालयों में तो खाली पड़ी जगह में कर्मचारियों ने बोरी या कपड़े डाले हुए हैं ताकि कुत्ते बाहर से आएं और इन पर बैठ कर आराम कर सकें।
जिला नागरिक अस्पताल, सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी, लघु सचिवालय, जिला न्यायालय, नगर निगम कार्यालय यमुनानगर व जगाधरी, बस स्टैंड यमुनानगर व जगाधरी, बिजली निगम के एसई कार्यालय, आरटीए कार्यालय, एक्साइज कार्यालय, मत्स्य विभाग, मार्केटिंग बोर्ड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, जिला परिषद कार्यालय, खेल विभाग, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, सरकारी स्कूल, श्रम विभाग समेत तमाम कार्यालय हैं, जिनमें सुबह से शाम तक बेसहारा कुत्तों का डेरा रहता है।
बेसहारा कुत्तों का एक क्षेत्र होता है। कुत्ते अपने एरिया में किसी दूसरे कुत्ते का दखल पसंद नहीं करते। यहां तक कि कई बार अपने एरिया में घुस आए बाहरी के साथ कुत्तों को भीषण संघर्ष करना पड़ता है। गली, मोहल्ले, सड़क चौराहे, बाजार हर जगह बेसहारा कुत्तों के एरिया हैं। इसी तरह उन्होंने सरकारी इमारतों में भी डेरा जमा लिया है।
इन स्थानों पर रहने वाले आवारा कुत्ते कहीं दूसरे स्थान पर नहीं जाते। धूप, गर्मी, बरसात व ठंड से बचने के लिए बेसहारा कुत्तों को एक ठिकाने की जरूरत होती है। सरकारी भवनों के खाली हिस्से खूंखार आतंक की इस जरूरत को पूरा कर रहे हैं। कई जगह कार्यालयों की दीवारों की ऊंचाई इतनी कम है कि कुत्ते आसानी से फांद कर भीतर घुस जाते हैं।
सरकारी कार्यालयों में जनता जनार्दन को बेसहारा कुत्तों से सुरक्षा की गारंटी नहीं है। नगर निगम, लघु सचिवालय, बिजली निगम,रेलवे स्टेशन, अस्पताल, बस स्टैंड ऐसे स्थल हैं जहां लोगों की आवाजाही भी ज्यादा होती है। ऐसे में इन दफ्तरों में लोगं कुत्तों का शिकार भी लोग ज्यादा बनते हैं। नगर निगम पर कुत्तों को पकड़ने की जिम्मेदारी है और जिला अस्पताल में इनके काटने पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। दोनों जगह बेसहारा कुत्तों का आतंक का है।
शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बसपा कार्यकर्ता । संवाद