संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ये कुत्ते रोजाना किसी न किसी को काट कर जख्म दे रहे। ऐसे में हर माह औसतन 500 लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के बाद भी शेल्टर होम तक नहीं बन पाया। जो पुराना है वो जर्जर हो चुका। नए का अभी तक कुछ अता पता नहीं।
कुत्ते रोजाना गलियों में झुंड बनाकर लोगों पर हमला कर रहे। ऐसे में लोग जाएं तो किस रास्ते से जाएं। क्योंकि शहर की कोई कॉलोनी या रास्ता नहीं बचा जहां इन कुत्तों का झुंड न दिखाई दे। पिछले साल 6391 लोगों को कुत्तों ने काटा था। यह तो केवल वह आंकड़ा ,है जिन्होंने कुत्ता काटने के बाद स्वास्थ्य विभाग से वैक्सीन लगवाई है। निजी अस्पतालों में उपचार कराने वालों की संख्या अलग से है।
शहर में कुत्तों के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों ने कुत्तों के डर से सुबह-शाम की सैर भी कम कर दी है। यदि कोई सैर पर जाता है अपने हाथ में डंडा रखता है। शहर की रिहायशी कॉलोनियों के अंदर व सड़कों किनारे जगह-जगह चिकन की दुकानें खुल गई हैं। दिनभर का काम खत्म होने के बाद दुकानदार मांस व चिकन के अवशेष आसपास सड़क किनारे या फिर खाली प्लॉटों में फेंक देते हैं। कुत्ते इन अवशेषों को खाने के लिए दूर से ही दौड़े आते हैं।
2015 के बाद नहीं हुई नसंबदी
शहर में आखिरी बार 2015 में 16170 कुत्तों की नसबंदी की गई थी, जिस पर 1.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। जानकारों की माने तो शहरी क्षेत्र में ही आवारा कुत्तों की संख्या 40 हजार से अधिक बताई जा रही है। बता दें शहर में कुत्तों की नसबंदी कराने का मामला इसी साल जनवरी से केवल टेंडर में ही उलझा हुआ है। टेंडर अब तक सिरे नहीं चढ़ सका। गत दिनों हुई नगर निगम सदन की बैठक में भी कुत्तों की नसबंदी का मामला पार्षदों ने जोर शोर से उठा था। बता दें एक मादा कुत्ता साल में दो बार बच्चे देती है। मादा साल में औसतन 10 से 12 बच्चों को जन्म देती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से 40 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु जन्म कुछ दिन बाद ही हो जाती है। ऐसे में छह बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। जितने कुत्ते बचते हैं उनमें 20 से 30 प्रतिशत मादा होती हैं।
आवारा कुत्तों को लेकर हम भी गंभीर है। इनकी संख्या पर काबू पाया जाना अति आवश्यक है। नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर लगाया था। केवल एक ही फर्म ने टेंडर के लिए आवेदन किया था। अब दोबारा टेंडर लगाया गया है। जल्द ही इनसे मुक्ति मिल जाएगी। - अनिल नैन, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, निगम यमुनानगर।