संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर से लेकर गांवों तक में बेसहारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रोजाना औसतन 31 लोगों को बेसहारा कुत्ते काट रहे हैं। नगर निगम की तरफ से कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया नौ माह से निविदा में उलझी है।
अब एक बार फिर आठ अक्तूबर को निविदा खुलनी है। उसी दिन पता चलेगा कि प्रक्रिया कुछ आगे बढ़ेगी या फिर एक नई तारीख लोगों को दी जाएगी। उल्लेखनीय है एक दिन पहले ही सेक्टर-15 में तीन कुत्तों के झुंड ने तीन साल की बच्ची पर हमला कर दिया।
बच्ची की पीठ पर कई जगह दांत व पंजों के निशान है। गनीमत यह रही कि वहां से गुजर रहे लोगों की नजर इन पर पड़ गई। पता नहीं कुत्ते बच्ची का क्या हाल करते। बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में ले जाया गया।
घटना के कई घंटे बाद भी बच्ची व उसकी मां के मन से कुत्तों के हमले की दहशत कम नहीं हुई है। कॉलोनियों, गांवों व शहर में घूम रहे बेसहारा कुत्ते हर माह औसतन 700 से 800 लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पिछले साल 6391 लोगों को कुत्तों ने काटा था। यह तो केवल वह आंकड़ा है जिन्होंने कुत्ता काटने के बाद स्वास्थ्य विभाग से वैक्सीन लगवाई है। प्राइवेट अस्पतालों में उपचार कराने वालों की संख्या अलग से है।
2015 के बाद नहीं हुई कुत्तों की नसबंदी
नगर निगम ने शहर में आखिरी बार 2015 में 16170 कुत्तों की नसबंदी करवाई थी। इस पर 1.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। एक अनुमान के अनुसार शहरी क्षेत्र में ही बेसहारा कुत्तों की संख्या 30 हजार से अधिक होगी। नगर निगम ने एक कुत्ते की नसबंदी करने की एवज में 880 रुपये का भुगतान एजेंसी को किया था। उस दौरान हुई नसबंदी पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब कुत्तों की नसबंदी हुई थी तो अब इनकी संख्या कई गुना कैसे बढ़ गई। नगर पालिका रादौर व साढौरा ने भी अभी तक कुत्तों की नसबंदी को लेकर कोई काम नहीं किया। कुत्तों से छुटकारा दिलाने संबंधित शिकायतें लगातार नगर निगम कार्यालय में अधिकारियों के पास आ रही हैं।
नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर लगाया था। केवल एक ही फर्म ने टेंडर के लिए आवेदन किया था। सिंगल बिड आने पर एजेंसी को वर्क अलॉट नहीं कर सकते हैं। आठ अक्तूबर को दोबारा टेंडर खोला जाएगा। उम्मीद है इस बार एक से ज्यादा एजेंसी आगे आएंगी। -महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम यमुनानगर।
सुंदर नगर कॉलोनी में जाने वाले रास्ते पर बैठे बेसहारा कुत्ते। संवाद