संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/रादौर। रादौर के टोपरा कलां गांव में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को विशेष आयोजन हुआ। भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिणी कोलोन पांच बौद्ध भिक्षुओं के साथ प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक अशोक एडिक्ट पार्क पहुंचीं। उच्चायुक्त ने टोपरा कलां में प्राचीन इतिहास को दर्शाने वाली शिला-लेख पट्टिका का अनावरण किया।
इसके साथ ही उन्होंने अशोक शिलालेख पार्क परिसर में साल के पौधों का रोपण भी किया। उच्चायुक्त दोपहर करीब ढाई बजे पार्क पहुंचीं और लगभग डेढ़ घंटे तक वहां रहीं।
इस दौरान उन्होंने अशोक चक्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वैशाख का यह दिन बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था।
उन्न्हों बताया कि वह लुंबिनी, बोधगया, वाराणसी, कुशीनगर और सारनाथ जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों का पहले ही भ्रमण कर चुकी हैं, लेकिन रादौर आने का यह उनका पहला अवसर है, जिसे लेकर वह उत्साहित थीं। उन्होंने बौद्ध स्थलों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार और पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
मैत्रेय ट्रस्ट के सिद्धार्थ गौरी ने उन्हें बताया कि बौद्ध परंपरा में साल वृक्ष का विशेष महत्व है। भगवान बुद्ध का जन्म साल वृक्ष के नीचे हुआ था और महापरिनिर्वाण भी साल वृक्षों के बीच ही हुआ था। कार्यक्रम के दौरान उन्हें स्तूप अवशेषों से प्राप्त प्राचीन ईंटों के अवशेष भेंट किए गए। उच्चायुक्त ने इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को समझते हुए यहां चल रहे संरक्षण और विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्थान अत्यंत शांतिपूर्ण है और प्राचीन धरोहरों को पुनर्जीवित करने के प्रयास सराहनीय हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस स्थल का दौरा कर इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जानें।
इस पूर्व एसडीएम रादौर नरेंद्र सिंह, सरपंच बलराम सैनी, पूर्व सरपंच मनीष नेहरा और सुरेश पंजेटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सिद्धार्थ गौरी, रामरतन नेहरा, मुनीष नेहरा, संदीप टोपरा सहित अन्य उपस्थित रहे।