संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के लिए गत वर्षों में मंजूर कई खेल योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाईं। सरकारी स्तर पर कई खेलों के मैदान व कोच भी नहीं हैं। इस तरह शहर से लेकर गांवों में खेल सुविधाओं की दरकार है, जिसे राजनीतिक दलों के नेता चुनाव माहौल में मुद्दा बना रहे हैं। खिलाड़ी और खेल प्रेमी भी जिले में सरकारी स्तर पर खेल सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं।
तेजली खेल परिसर में खेल सुविधाओं को बढ़ाने व अन्य व्यवस्थाओं के सुधार के लिए 90 करोड़ खर्च करने की घोषणा की गई थी। इसके तहत पहले फेज में इंडोर खेलों और दूसरे फेज में आउटडोर खेलों के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जानी थीं, पर योजना के तहत निर्माण कार्य शुरू होने तो दूर औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हो पाईं।
इसी तरह सरकारी स्तर पर खेल कोच भी नाममात्र हैं। कई खेलों के मैदान हैं, पर कोच नहीं हैं। क्रिकेट से लेकर ओलंपिक के भी काफी खेलों के कोच नहीं हैं। इससे खिलाड़ी मजबूरन निजी संस्थानों या दूसरे जिलों व राज्यों का रुख कर रहे हैं। आर्थिक कमजोर खिलाड़ी चाह कर भी खेल अभ्यास व प्रतिभा नहीं दिखा पा रहे हैं।
तेजली खेल परिसर में बनने वाला चार सौ मीटर और आठ लेन का सिंथेटिक ट्रैक वर्ष-2021 में मंजूर हुआ था। इसकी ड्राइंग तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय को करीब नौ करोड़ रुपये की मांग भेजी गई थी। मुख्यालय से जिला कार्यालय को 7.87 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए थे। ऐसे ही एस्ट्रोटर्फ मैदान भी कई वर्ष पहले मंजूर है।
इसके लिए पहले करीब 4.95 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बना गया था। जिसके बाद में रिवाइज कर नौ करोड़ रुपये किया गया था। अभी तक न तो सिंथेटिक ट्रैक और न ही हॉकी के एस्ट्रोटर्फ मैदान का निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। दोनों खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास व प्रदर्शन करने में परेशानी आ रही है।
कागजों में ज्यादातर खेल योजनाएं : अनिल
आजाद नगर निवासी अनिल कुमार ने कहा कि जिले के लिए खेल घोषणाएं तो हुईं, पर ज्यादातर कागजों में है। सरकारी स्तर पर काफी खेलों के कोच नहीं है। जिन खेलों के मैदान हैं, उनके कोच नहीं हैं। ऐसे में खासकर आर्थिक कमजोर खिलाड़ी प्रतिभा होने के बावजूद खेलना छोड़ देते हैं, इसलिए घोषणाओं से नहीं बल्कि धरातल पर खेल सुविधा दिलाने का काम होना चाहिए।
दम तोड़ रहीं खेल प्रतिभाएं : नितिन
जम्मू कॉलोनी निवासी नितिन ने कहा कि मोबाइल, नशे व अन्य लत से बच्चों, किशोर व युवाओं को दूर रखने के लिए उन्हें खेलों से जोड़ना जरूरी है। क्योंकि खेल शारीरिक व मानसिक मजबूत बनाते हैं। साथ ही खेलों में भविष्य भी उज्ज्वल बनाया जा सकता है। इसलिए सरकारी स्तर पर सभी खेल सुविधाएं होनी चाहिए, पर ऐसा न होने से खेल प्रतिभा दम तोड़ रही है।
गलियों में खत्म क्रिकेट का जुनून : राजकुमार
दशमेश कॉलोनी निवासी राजकुमार ने कहा कि जिले में सबसे ज्यादा रुझान क्रिकेट खेल का है, पर सरकार स्तर पर वर्षों से क्रिकेट खेल का कोच नहीं है। हालांकि तेजली खेल परिसर में सरकारी स्तर पर क्रिकेट मैदान है, पर कोच न होने से उसमें भी झाड़ लगे हैं। ऐसी स्थिति में जिले की क्रिकेट खेल का जुनून गलियों-सड़कों पर ही खत्म हो जाती है।
असुविधा से जिले को पदक नहीं : दीक्षित
पुराना हमीदा निवासी दीक्षित शर्मा ने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ी ओलंपिक में पदक लेकर आते हैं, पर उनमें जिले से कोई नहीं होता। ये देख बुरा लगता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जिले में ओलंपिक के खेलों के या तो मैदान नहीं है या कोच नहीं हैं। युवा ओलंपिक के खेलों का अभ्यास कर देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं, पर असुविधा में संभव नहीं हो पाता है।