बिलासपुर। बीती रात पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश से सोमनदी उफान पर आ गई। देर रात्रि तीन बजे सोमनदी में 15000 क्यूसेक पानी पहुंच गया। वहीं सुबह सात बजे तक पानी का स्तर घटकर 1180 क्यूसेक रह गया। इस कारण सोमनदी के पास लगते गांव रूकाली, मलिकपुर बांगर, बसातियांवाला, लोप्यो के खेतों में नदी का पानी घुस गया। इससे आसपास के गांवों के दर्जनों किसानों की 250 एकड़ धान, गन्ने व पशुओं के चारे की फसल डूब गई है। किसानों का कहना है कि गेहूं सीजन में सोमनदी से खराब हुई फसल का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। इसके बाद अब धान व गन्ने की फसल सोमनदी के पानी की भेट चढ़ गई। किसानों ने प्रशासन से स्थायी प्रबंधन की मांग की है।
पानी निकासी का समुचित प्रबंध नहीं
सोमनदी के उफान के बाद खेतों में दो से तीन फीट पानी जमा हो गया है। इस कारण धान व गन्ने की फसल खराब होने की संभावना है। नदी का पानी कम होने के बाद अब किसानों को खेत से पानी निकालने की चिंता होने लगी है। खेतों से पानी निकासी में पांच से छह सप्ताह लग जाएगा। इतने समय में धान, गन्ना व पशुओं के चारे की फसल सड़ने लगेगी। वहीं अगली फसल की बुआई भी प्रभावित होगी।
पानी निकासी के लिए पंप सेट लगाए
गांव रूकाली के समीप सोमनदी के पानी की खेतों से निकासी को लेकर विभाग ने पंप सेट लगवाए गए हैं, जो कि पर्याप्त नहीं हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में तीन से चार फीट तक पानी जमा है। पंप सेट से खेतों से पानी निकासी की व्यवस्था सही नहीं है। इसके लिए प्रशासन को व्यापक प्रबंधन करना होगा। किसानों ने नदी के समीप सही जगह पर बंध बनाने की मांग की है ताकि सोमनदी के उफान से खेतों की फसलों के नुकसान को बचाया जा सके।