संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पंचम दिवस पर अध्यात्म और संस्कारों के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान शोभित गुप्ता, वर्तिका गुप्ता, राजीव ढींगरा, अल्का ढींगरा, रूपेश विज, मोनिका विज पूजन के साथ किया गया।
इस अवसर पर सढौरा विधायक ऋषिपाल व रेणु बाला, यमुनानगर विधायक घनश्याम अरोड़ा, एसएचओ सिटी जगाधरी विरेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने ज्योति प्रज्वलित कर कार्यक्रम में सहभागिता की। कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती ने भागवत कथा के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने आत्मदेव और धुंधुकारी की कथा के माध्यम से समझाया कि यदि संतानों में संस्कारों का बीजारोपण नहीं किया गया तो समाज में नैतिक पतन निश्चित है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी तकनीकी रूप से सक्षम जरूर है, लेकिन नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है। इंटरनेट और आधुनिक जीवनशैली के बीच बच्चे धैर्य और आत्मनियंत्रण खोते जा रहे हैं। ऐसे में अध्यात्म ही एकमात्र माध्यम है, जो बच्चों को आत्मचिंतन, संयम और कृतज्ञता सिखा सकता है। साध्वी ने कहा कि जब बच्चा ईश्वर से जुड़ता है तो उसमें दया, करुणा और परोपकार के गुण स्वतः विकसित होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे घर में आध्यात्मिक वातावरण बनाएं, ताकि बच्चों को सही दिशा मिल सके।