संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र में आयोजित श्रीकृष्ण रासलीला में वीरवार रात्रि गोवर्धन पूजा लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जीवंत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
रासलीला में दिखाया गया कि प्राचीन काल से बृजवासी महाराज इंद्र की पूजा करते आ रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनके लाड़-प्यार में बृजवासी इस बार इंद्र पूजा की तैयारियां करना भूल जाते हैं। पूजा से कुछ दिन पहले उन्हें इसकी याद आती है, जबकि पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी जाती थीं।
इसके बाद बृजवासियों की पंचायत होती है और जल्द तैयारियां पूरी करने का निर्णय लिया जाता है। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण अपने पिता को स्वप्न में चार भुजाओं वाले देवता के दर्शन होने की बात बताते हैं। वह बृजवासियों को इंद्र देवता के स्थान पर गोवर्धन महाराज की पूजा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
शुरुआत में बृजवासी उनकी बात से सहमत नहीं होते, लेकिन विचार-विमर्श के बाद गोवर्धन पूजा करने का निर्णय लेते हैं। बृजवासियों के इंद्र पूजा के बजाय गोवर्धन महाराज की पूजा करने से इंद्र देव क्रोधित हो जाते हैं और मूसलाधार बारिश शुरू कर देते हैं। बृजवासियों को संकट से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लेते हैं।
पर्वत के नीचे सभी बृजवासी सुरक्षित रहते हैं। अंत में इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास होता है और वे भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हैं। इसके बाद से गोवर्धन पूजा की परंपरा निरंतर चली आ रही है। इससे पूर्व विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश सपरा, मार्केट कमेटी अध्यक्ष राकेश त्यागी और भगवान परशुराम सेवा समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रास मंडली के रसाचार्य प्रिय शरण दास महाराज के मार्गदर्शन में कलाकारों ने अभिनय किया।
भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र में रासलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद