संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिटी मॉल और रेलवे रोड स्थित वरयाम सिंह अस्पताल में हुई फायरिंग की जांच अब एक नए और एंगल तक पहुंच गई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह वारदात केवल रंगदारी का मामला नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए शूटरों को गिरोह में भर्ती के बढ़ते ट्रेंड का हिस्सा है।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाने के कारण विदेश में बैठे गैंगस्टरों के संपर्क में आए थे। अब पुलिस इस पूरे डिजिटल नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी।
मुख्य आरोपी गुरलाल उर्फ गोरा ने खुद को कुरुक्षेत्र का निवासी बताया, लेकिन जांच में वह पंजाब के सामना का रहने वाला निकला। वहीं नितिन और सागर ने खुद को नाबालिग बताकर बचने की कोशिश की, मगर दस्तावेजों में दोनों बालिग पाए गए। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो और रील अपलोड कर खुद को प्रभावशाली और अमीर दिखाने की कोशिश करते थे। यही दिखावा उनके लिए जाल बन गया। विदेश में बैठे गैंगस्टरों ने ऐसे युवकों की प्रोफाइल खंगालकर उनसे संपर्क किया और उन्हें जल्द पैसा कमाने के सपने दिखाए। महंगी गाड़ियां, मोटी रकम और विदेश में बसाने का लालच देकर उन्हें रंगदारी नेटवर्क में शामिल किया गया।
एएसपी अमरिंदर सिंह ने बताया कि शनिवार रात तीनों हमलावरों ने पहले रेलवे रोड स्थित निजी अस्पताल में घुसकर 13-14 राउंड फायरिंग की और फिर सिटी मॉल के बाहर भी गोलियां चलाईं। घटना के बाद शहर में नाकाबंदी कर दी गई और रविवार सुबह गांव सुढैल के पास मुठभेड़ हुई, जिसमें दोनों ओर से करीब 25-30 राउंड गोलियां चलीं।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में गुरलाल और नितिन गोली लगने से घायल हुए, जबकि तीसरा आरोपी सागर बाइक से गिरकर घायल हो गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान हथियार सप्लाई, फंडिंग और विदेश में बैठे सरगनाओं तक पहुंचने वाले पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
बदमाशों से मुठभेड़ के बाद जांच करती पुलिस। आर्काइव