यमुनानगर। यमुनानगर समेत प्रदेश के सभी जिलों में शहरों की सुरक्षा व्यवस्था अब पुख्ता होगी। शहरों में सभी चौक चौराहों और कॉलोनियों में पुलिस विभाग की तरफ से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए पुलिस विभाग को 19 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल में स्मार्ट सिटी के तहत यह प्रोजेक्ट पहले ही पूरा हो गया था। अब 19 करोड़ रुपये से बाकी के 19 जिलों में सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
कैमरे लगने के बाद पुलिस न केवल यातायात, जाम जैसी व्यवस्था पर नजर रख पाएगी बल्कि किसी वारदात के होने पर उसे सुलझाने में भी मदद मिलेगी। सभी सीसीटीवी वाईफाई से लैस होंगे। शहर में चोरी, लूटपाट, गोली चलाने की आपराधिक घटनाएं लगातार होती रहती हैं। आरोपी घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते है और पुलिस आरोपियों की पहचान के लिए शहर में भवनों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले में जुट जाती है।
कई बार पुलिस फुटेज की मदद से आरोपियों तक पहुंच जाती है तो कई बार उसे मायूसी हाथ लगती है। कई घटनाओं के बाद आरोपियों के उपयोग में लाए गए वाहन के नंबर दिखाई नहीं देते तो कई बार आरोपियों की शक्ल स्पष्ट दिखाई नहीं देती। इससे आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाते है। शहर में चोरी की बढ़ती घटनाओं से नगरवासियों में हर समय अपने व परिवार की जान माल को लेकर चिंता बनी रहती है। इसके अलावा पुलिस ने कई आरोपियों को सीसीटीवी फुटेज की मदद से पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। इसलिए शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने बहुत जरूरी हैं।
पुलिस विभाग द्वारा शहर में बुलेट कैमरों के अलावा एएनपीआर कैमरे भी लगवाए जाएंगे। एएनपीआर कैमरे किसी भी वाहन की नंबर प्लेट को अपने आप ही पढ़ लेते हैं। नंबर प्लेट की फोटो खींच कर उसे सर्वर में भेजते हैं। जहां पर यातायात पुलिस नंबर प्लेट के आधार पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के चालान काट सकेगी। अवगत हो कि शहरी क्षेत्र में चौक चौराहों पर यातायात नियमों को तोड़ते हैं। रेड लाइट को जंप करके आगे बढ़ जाते हैं। जिससे हादसा होने की संभावना भी रहती है। एएनपीआर कैमरे लगने से पुलिस कंट्रोल रूम में बैठ कर ऐसे वाहन चालकों के चालान कर सीधे घर भेज सकेगी। संवाद
यह होगा फायदा
- शहर में किसी भी तरह की आपराधिक घटना के बाद आरोपी का आसानी से बच निकलना मुश्किल होगा।
- आरोपी मौके से अगर फरार हो भी जाएगा तो जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर व घटना कैद हो जाएगी और पुलिस के लिए उसको पकड़ना आसान हो जाएगा।
- सीसीटीवी लगे होने के कारण आरोपी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की आसानी से हिम्मत नहीं करेगा। क्योंकि उसे पता होगा कि उसकी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद होगी और उसका बच के निकलना मुश्किल होगा।
- चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
रोड सेफ्टी फंड से पुलिस विभाग को 19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। प्रत्येक जिले को औसतन एक करोड़ रुपये मिलेंगे। इस पैसे से पुलिस शहर में सीसीटीवी लगवा सकेगी। साथ ही खराब कैमरों की मरम्मत भी करवा सकेंगे। - हैरतजीत कौर, जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी।