संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। स्कूलों में दाखिला शुरू होने के साथ बाजारों में एक साथ कई किताबों की मौसमी दुकानें खुल गई हैं। यह दुकानें केवल एक से डेढ़ महीने दाखिले के दौरान ही खुलती हैं और पूरा साल बंद रहती हैं। खास बात यह कि इन दुकानों पर पब्लिक, कॉन्वेंट व अन्य सीबीएसई के निजी स्कूलों की किताबें ही मिलती हैं।
निजी स्कूलों में दाखिले शुरू हो चुके हैं और इन दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ है। सुबह से शाम तक किताबें खरीदने वालों की इन दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। वहीं, किताबों के साथ स्टेशनरी भी इन दुकानों से दी जा रही है। अभिभावक भी इन दुकानों से किताबें लेने को मजबूर हैं। परंतु पूरा साल बंद रहने वाली दुकानें इन्हीं दिनों खुलती हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती है। दरअसल यह दुकानें निजी स्कूल संचालकों की सहयोगी हैं।
अभिभावकों को स्कूल से इन मौसमी दुकानों पर किताबें खरीदने के लिए भेजा जाता है। इन दुकानों पर स्कूलों के नाम की नोटबुक, डायरी, ड्राइंग, वर्कबुक सहित अन्य स्टेशनरी का सामान भी मिल रहा है, जो अभिभावकों को लेना जरूरी है। इन दुकानों पर जहां अभिभावकों की जेब पर कैंची चलाई जा रही है, वहीं सरकार को भी राजस्व की चपत लगाई जा रही है।
फर्जी नामों से चलने वाली दुकानें महज कुछ दिन के लिए खुलकर बंद हो जाती हैं। इसके बाद पूरा साल इन दुकानों के शटर पर ताला रहेगा और नए सत्र पर फिर से यह दुकानें खुल जाएंगी। हर साल शहर में यही खेल चलता है। इस सत्र में करीब एक दर्जन दुकानें ऐसी हैं जो अभी कुछ दिन पहले ही खुली हैं।
यही इतना नहीं कई दुकानें तो ऐसी हैं जिनमें काउंटर और किताबें रखने के लिए रैक तक नहीं है। एक दुकान लेकर वहां पर बैंच और कुर्सी लगाकर बुक शॉप खोल दी गई है। इन दुकानों पर किताबें व स्टेशनरी तिरपाल बिछाकर जमीन पर रखी गई हैं। हालांकि डीसी की निगरानी में बनी कमेटी में एसडीएम और ईटीओ को शामिल किया गया है।
इस कमेटी में जिला शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं, ताकि नियमित व निजी प्रकाशकों की किताबों का पता लगाया जा सके। दरअसल यह मामला शिक्षा विभाग का है लेकिन उनका दायरा सीमित होने के कारण एसडीएम को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक रूप से कार्रवाई हो।
मैनुअल मिलता है बिल
इन दुकानों से किताबें खरीदने पर अभिभावकों से मूल कीमत के साथ जीएसटी भी वसूली जा रही है। अभिभावकों को इसका पक्का बिल नहीं दिया जा रहा है। प्रिंट रेट पर पांच प्रतिशत छूट का हवाला देकर लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है। चूंकि किताबों पर प्रिंट रेट सभी कर मिलाकर अंकित किया जाता है। अभिभावकों को साधारण कागज पर पैन से मैनुअल बिल बनाकर दिया जाता रहा है। बाजार में मिलने वाली 30 रुपये की नोटबुक इन दुकानों पर 80 रुपये की मिल रही हैं।
कमेटी निरीक्षण कर रही हैं। बाजार में खुली दुकानों पर भी जांच की जाएगी। यदि लोग इसकी सूचना देंगे तो प्रशासन को भी आसानी होगी। बाजार में खुली मौसमी किताबों की दुकानों पर जीएसटी टीम के साथ जांच की जाएगी। खामियां मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - सोनू राम, एसडीएम जगाधरी।