संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार करने के विरोध में धरना दे रहे संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों को लघु सचिवालय में पुलिस की धक्कामुक्की का सामना करना पड़ा। इसके विरोध में किसानों ने नारेबाजी कर दी। किसानों को पुलिस की गाड़ियों में बैठाकर पुलिस लाइन में छोड़ दिया गया।
किसानों ने धक्कामुक्की के विरोध में यमुनानगर में सात नवंबर को प्रदेशभर से किसानों व नेताओं की महापंचायत करने की बात कही। जिसमें कड़ा निर्णय लेने की बात कही गई। यह सब घटनाक्रम तब हुआ जब कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल, अंबाला सांसद वरुण मुलाना, यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा व जगाधरी विधायक अकरम खान और जिला परिषद के चेयरमैन रमेश ठसका लघु सचिवालय के अंदर विकास कार्यों को लेकर बैठक ले रहे थे।
भाकियू (टिकैत) के जिला प्रधान सुभाष गुर्जर, जरनैल सिंह, गुरभजन सिंह मझैल, धर्मपाल चौहान, महीपाल चमरौड़ी ने कहा कि धान के सीजन में प्रदूषण का सारा दोष किसानों के सिर मंढा जा रहा है। कृषि विभाग, प्रशासन व अन्य एजेंसियां ऐसे काम कर रही हैं. जैसे किसान के खेत से ही प्रदूषण जन्म ले रहा है। पराली प्रबंधन की उचित व्यवस्था के लिए सरकार को जो दीर्घकालिक और अल्पकालिक कदम उठाने चाहिए।
इसके बजाय प्रदेशभर में किसानों पर मुकदमे दर्ज कर उनके फसल खरीद के पोर्टल पर लाल एंट्री की जा रही है। हरियाणा सरकार की किसानों पर ये करवाई केंद्र सरकार द्वारा नौ दिसंबर 2021 के उस समझौते के खिलाफ है जिसके बिंदु पांच में केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि पराली मामले में भारत सरकार के कानून की धारा 14 और 15 से किसानों को आपराधिक दायित्व से मुक्ति दी जाएगी।
सुभाष गुर्जर का कहना है कि पराली जलाने वालों पर केस दर्ज करने के विरोध में किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। इस दौरान एसडीएम जगाधरी उनके पास आकर कहने लगे कि सचिवालय में फिलहाल एमपी मीटिंग ले रहे हैं। इस पर सात किसान यहां पर रुक जाएं और बाकी को घर भेज दें। एसडीएम की बात पर विश्वास करके उन्होंने बाकी किसानों को घर भेज दिया।
काफी देर तक कोई भी ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचा। इसलिए वह खुद ही ज्ञापन देने जा रहे थे। सुभाष गुर्जर ने कहा कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही कह दिया था कि यदि कोई ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा तो वह लघु सचिवालय की दीवार पर उसे चिपका आएंगे। जब वह अंदर जा रहे थे तो पुलिस ने उनके साथ धक्कामुक्की की।
किसानों को घसीटते हुए बाहर भेज दिया गया। इसके बाद उन्हें गाड़ी में पुलिस लाइन जगाधरी में छोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने झूठ बोल कर पहले आधे किसानों को घर भेज दिया और फिर उनके साथ ऐसा बर्ताव किया। सात नवंबर को प्रदेशभर से किसान और नेता यमुनानगर में महा पंचायत करेंगे। इस मौके पर विजेंद्र राणा, बलविंद्र नंबरदार, दीप राणा नंबरदार, जसबीर सिंह अजीजपुर, जसविंद्र सिंह, जनकराज पांडो, जसपाल सिंह नोशहरा, सुखदेव समलेमपुर, रामकर्ण, हरपाल सिंह, नेत्रपाल, मान सिंह, संजय सिंह, प्यारे लाल, मान सिंह व रोशन लाल मौजूद रहे।
ये हैं किसानों की मुख्य मांगें
पराली के नाम पर किसानों पर दर्ज मुकदमे खारिज किए जाएं। पराली प्रबंधन की उचित व्यवस्था सरकार करे या इसके प्रबंधन पर आने वाले खर्च की भरपाई सरकार किसान को करे। पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित मुद्दों के निपटारे के लिए सरकार सभी प्रभावितों को साथ लेकर ठोस योजना बनाए, हर वर्ष किसानों पर दोष लगाना बंद करें। सभी जिलों में डीएपी खाद की कमी है। सरकार खाद की आपूर्ति बढ़ाए। ग्रामीण सोसायटी के माध्यम से किसानों को जरूरत के अनुरूप खाद उपलब्ध हो। सभी जिलों के कृषि अधिकारियों के मार्फत सभी बिक्री केंद्रों पर स्टॉक बोर्ड लगवाना सुनिश्चित करें। खाद के साथ अन्य कृषि सामग्री जिससे नैनो डीएपी, बीज, दवाई, नैनो यूरिया जबरन बेचना बंद हो। नकली खाद, बीज, दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। सभी फसलों की खरीद, फसलों के उठान को गति दे जल्द खरीद सुनिश्चित करवाई जाए।