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हिमाचल से एनओसी मिलने के बाद फिर बहने लगेगी सरस्वती नदी
-अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव पर बोले मंत्री कटारिया, कार्यकाल में पूरा होगा काम
-सरकार ने सरस्वती की धारा लाने के लिए बनाया हैरिटेज विकास बोर्ड
-भौगोलिक स्थितियां बदलने के कारण आ रही दिक्कत, 2024 तक योजना होगी पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/बिलासपुर। सरस्वती नदी की धारा को धरातल पर लाने की योजना अंतिम चरण में है। हिमाचल प्रदेश सरकार से एनओसी मिलते ही इस काम में और तेजी आएगी। प्रदेश का यह सरस्वती उद्गम स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो रहा है। उक्त बातें सरस्वती उद्गम स्थल पर अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय जलशक्ति राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया ने कही। कुरुक्षेत्र सांसद नायब सैनी व मंगोलिाया के त्रिनीदाद व टोबेगो के हाई कमीशन डॉ. रोजर गोपोल व उनकी धर्मपत्नी अनिता गोपोल समारोह में अतिथि के रूप में पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड बनाया है, जिसके तहत सरस्वती नदी की पावन धारा को धरती पर लाने का किया जा रहा है। सरस्वती की धारा को धरा पर लाना चुनौती पूर्ण कार्य है। समय बीतने, भौगोलिक परिस्थितियों बदलने से स्थिति विकट हो गई है। लेकिन इस पवित्र धारा को फिर से प्रवाहित किया जाएगा। अपनी विरासत के अनुसार अपने हैरिटेज सुरक्षा को लेकर केंद्र व राज्य सरकार गंभीर होकर कार्य कर रही है।
सरस्वती हैरिटेज के तहत बनाए जा रहे प्रोजेक्ट के लिए बजट की कमी नहीं है। इस्टीमेट तय हो चुका है, लेकिन हिमाचल प्रदेश से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के साथ ही इस योजना का आगामी कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यहां केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से चमौली में ग्लेशियर टूटा है उससे स्वयं ही एक झील बन गई है। इस तरह की आपदा से सरस्वती की धारा को नुकसान हुआ होगा। सैटेलाइट से जुटाई जानकारी से स्पष्ट होता है कि छह हजार साल पहले बहने वाली सरस्वती नदी आज भी बह रही है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों में परिवर्तन आने से स्थिति विकट बन गई है। जिससे सरस्वती की धारा को धरा पर लाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। लेकिन यह कार्य को पूरा किया जाएगा। सरकार अपने इस कार्यकाल तक इस कार्य को पूरा कर लेगी। एक बार फिर प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम दिखाई देगा। 2024 तक एक बार सरस्वती की धारा को प्रवाहित करने में अवश्य सफलता मिलेगी। योजना को लेकर केंद्र जल आयोग की बैठक भी हो चुकी है। एक साल कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण यह कार्य लंबित हो गया है। लेकिन अब इसे दोगुनी तेजी से किया जाएगा, ताकि 2024 तक सभी कार्य पूरे करवा दिए जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आदिबद्री सरस्वती उद्गम स्थल के लिए 11 लाख रुपये की राशि दे रहा हूं जो कार्य सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के तहत किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि पद्म विभूषण दर्शन लाल जैन ने जीवन भर सरस्वती के पुनर्जीवित करने के लिए कार्य किया है उनके अथक प्रयास व प्रेरणा से यहां तक पहुंचे हैं। हिमाचल और हरियाणा में बरसाती पानी रोकने के लिए डैम व बैराज बनाया जाएगा। इस योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने दर्शन लाल जैन की प्रतिमा पर पुष्प भी अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। समारोह में 27 नक्षत्रों के अनुसार पौधे लगाए गए। तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समारोह का समापन कुरुक्षेत्र में होगा।
देश की 30 नदियों को जा रहा है जोड़ा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नल से जल योजना के तहत देश के तीन करोड़ चालीस लाख घरों को पानी दिया गया है। दो लाख घरों को प्रतिदिन जल देने की योजना पर काम किया जा रहा है। 2024 तक सवा 19 करोड़ परिवारों को योजना के तहत पानी दे दिया जाएगा। देश में 30 मुख्य नदियों को जोड़ कर बारिश के पानी को एकत्रित कर घटते जल स्तर की समस्या को दूर किया जाएगा। कैन बेहुआ योजना से इंटर लिकिंग का सपना पूरा किया जाएगा। लखवार डैम, रेणुका डैम व एक अन्य डैम को जोड़ कर यमुना में पानी के स्तर को गंगा के समान करने का प्रयास किया जाएगा। जिस प्रकार गंगा नदी में पूरा वर्ष भारी मात्रा में जल की उपलब्ध होती है उसी की तर्ज पर यमुना में पानी लाने के लिए योजना पर काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट से बैराज बनाने व डैम बनाने के लिए अंतिम रूप देने में कार्य किया जा रहा है।
फोटो:- 21, 22